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पुलिस को जहर देकर मारने की तैयारी में नक्सली

7 वर्ष पहले
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बिहारमें माओवादी नए प्रयोगों से नहीं चूक रहे हैं। माओवादी इतिहास में पहली बार एसएमएस के जरिए लोकसभा चुनावों का बहिष्कार करने के बाद अब पुलिस को जहर देकर मारने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। इसके लिए जंगलों में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों से जहर बनाने में नक्सली जुट गए हैं। कांबिंग ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों और पुलिस के भोजन में इसे मिला कर बड़े जानमाल के नुकसान की साजिश तैयार की गयी है। खुफिया विभाग को इसकी सूचना मिलने के बाद आनन-फानन में कई जिलों की पुलिस को अलर्ट जारी किया गया है। देश के रेड कॉरीडोर छत्तीसगढ़, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश में नक्सलियों को निशाना बनाने के लिए छिपे तौर पर पुलिस यह प्रयोग कर चुकी है। ग्रामीणों के जरिए नक्सलियों के भोजन में जहर मिलाने के मामले सामने चुके हैं। अब माओवादी इसे पुलिस पर आजमाने की फिराक में हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों के कांबिंग ऑपरेशन के दौरान उनके भोजन में चोरी छिपे जहर मिलाने की योजना पर भाकपा (माओवादी) तेजी से काम कर रहा है।

कांबिंग के दौरान कई बार सुरक्षा बल भोजन और पानी के लिए ग्रामीणों पर निर्भर करते हैं। अपना राशन समाप्त होने के बाद वे ग्रामीणों को पैसे देकर भोजन की व्यवस्था कराते हैं। इस भोजन में नक्सली जहर मिला सकते हैं। चूंकि यह सारी योजना नक्सली प्रभुत्व वाले इलाके में अंजाम दी जाएगी, तो नक्सलियों के लिए काफी आसानी होगी। पुलिस सूत्रों की मानें तो यह अलर्ट भागलपुर एसएसपी और नवगछिया के एसपी को सबसे पहले भेजा गया है।

थोड़ा सा हिस्सा भी जानलेवा

माओवादियोंके छिपने का इलाका जंगल है। बिहार के जंगलों में बेला बीज की भरमार है। इस बीज को संग्रह कर चूना के साथ गोंद में दो माह तक रखने पर पारंपरिक विधि से जहर तैयार हो जाएगा। इस जहर के बारे में विशेषज्ञ भी मानते हैं कि यह काफी घातक है। इसका थोड़ा हिस्सा भी कई लोगों की जान ले सकता है। बकौल डॉ. दिवाकर तेजस्वी जिस विधि की बात हो रही है इससे मूल पदार्थ में केमिकल रिएक्शन होगा। तैयार होने वाले जहर से शरीर की किडनी और लीवर को नुकसान पहुंचेगा। जहर देख कर ही बताया जा सकता है कि इसकी कितनी मात्रा कितने कम समय में असरदार होगी, लेकिन जो बताया जा रहा है, उससे तो मौत निश्चित है। इसका कोई प्रतिकारक नहीं है।