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दवा घोटाले में मेरी संलिप्तता नहीं : चौबे

7 वर्ष पहले
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बिहारके बक्सर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के सांसद और राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने चर्चित दवा घोटाले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री के इशारे पर यह घोटाला हुआ है, इसलिए राज्य सरकार ब्यूरो से जांच कराने से भाग रही है। चौबे ने पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जिस तरह से राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इस दवा घोटाले में उनका नाम जोड़ रहे हैं, उससे वह काफी दुखी हैं। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री जिनके पास सही मायने में सत्ता की चाभी है, वह सबकुछ अच्छी तरह से जानते रहे हैं और उनके ही इशारे पर इस घोटाले में शामिल अधिकारियों को बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य स्वास्थ्य मिशन के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं और इस मिशन का कार्य क्षेत्र चिह्नित रहता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकार को बौना कर इसके सारे अधिकार राज्य स्वास्थ्य समिति तथा बिहार राज्य चिकित्सा सेवा आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बीएमआईसीएल) को दे दिया गया है

गलत बयान दे रहे स्वास्थ्य मंत्री

सांसदने कहा कि बिहार के स्वास्थ्य मंत्री को यह बताना चाहिए कि पिछले तीन माह के दौरान उनके पास दवा खरीद और उपकरण के संबंध में राज्य स्वास्थ्य समिति और बीएमआईसीएल की आेर से कितनी संचिका भेजी गई है। उन्होंने कहा कि बिना तथ्यों की जानकारी लिए वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री का इस तरह का बयान देना गलत है कि वर्ष 2000 से अब तक जो भी स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं, उनसे पूछताछ की जाएगी। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि संविधान की किस धारा के तहत स्वास्थ्य मंत्री को पूछताछ करने का यह अधिकार मिला हुआ है।

मीिडया से रू-ब-रू होते अश्विनी कुमार चौबे अन्य।

चार सिविल सर्जन पर की कार्रवाई

चौबेने कहा कि उनके स्वास्थ्य मंत्री के कार्यकाल में दवा खरीद से संबंधित कोई भी संचिका अनुमोदन के लिए नहीं आई थी। उन्होंने कहा कि जहां तक किसी फर्म या किसी पदाधिकारी के द्वारा अनियमितता बरते जाने के संबंध में किसी तरह का आरोप उनके समक्ष आने पर तत्काल कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए चार सिविल सर्जनों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई, जिसकी घोषणा विधान मंडल में की थी। हालांकि बाद में सरकार ने एेसे भ्रष्ट