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21वीं सदी की पुलिस निर्दयी नहीं हो सकती, इसे सभ्य बनना होगा : राजनाथ

4 वर्ष पहले
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गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पुलिसकर्मियों को नसीहत दी है कि दंगे या प्रदर्शन जैसे हालात से निपटते वक्त वह आपा खोएं। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में पुलिस निर्दयी बनकर नहीं रह सकती है। इसे सभ्य बनना ही होगा।

राजनाथ दंगा नियंत्रक बल के रूप में पहचान बना चुकी रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की 25वीं वर्षगांठ पर शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कई बार हालात संभालने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ता है, लेकिन ऐसी स्थिति में भी विवेक से काम लेना चाहिए। प्रदर्शन या दंगे के दौरान तोड़फोड़ पर उतारू भीड़ का ध्यान बांटने के लिए पुलिस नई तकनीक और मनोवैज्ञानिक उपायों का इस्तेमाल करे। उन्होंने बताया कि भीड़ को नियंत्रण करने के कम घातक तरीके विकसित करने के लिए ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट से भी कहा गया है। उन्होंने कहा कि जाति, धर्म और क्षेत्र के नाम पर देश को तोड़ने की कोशिशों पर भी नजर रखनी चाहिए।

{आरएएफ की 5 नई बटालियन गठित होंगी। यह 1 जनवरी 2018 से ऑपरेशनल हो जाएंगी।

{35 हजारजवान हाल में पदोन्नत किए हैं। बाकियों को तरक्की देने का रास्ता खोजा जा रहा है।

{जवानोंको वर्दी के लिए सालाना 10 हजार रु. मिलेंगे। पहले फोर्स की ओर से वर्दी मिलती थी।

{आरएएफके 25 साल पूरे होने पर गृह मंत्री ने डाक टिकट भी जारी किया।

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