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मुख्यमंत्री के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज हो : सुशील मोदी

7 वर्ष पहले
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दामाद को अपना निजी सहायक और भांजा को आदेशपाल के पद पर नियुक्त कर मांझी ने धोखाधड़ी की

भाजपाने गुरुवार कहा कि दामाद को अपना निजी सहायक और भांजा को आदेशपाल के पद पर नियुक्त कर मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने धोखाधड़ी की है, इसलिए उनके खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज होना चाहिए और साथ ही उन्हें नैतिकता के आधार पर इस्तीफा भी देना चाहिए। पूर्व उप मुख्यमंत्री और भाजपा विधानमंडल दल के नेता सुशील कुमार मोदी ने पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मांझी के दामाद देवेंद्र कुमार को निजी सहायक तथा भांजा सत्येंद्र कुमार को आदेशपाल के पद पर नियुक्ति सोची समझी रणनीति के तहत की गई। इस तरह की नियुक्ति सिर्फ भ्रष्ट आचरण की गोपनीयता को बनाए रखने के उद्देश्य से ही किया गया।

मोदी ने कहा कि मांझी जब राजद की सरकार में शिक्षा मंत्री के पद पर थे उस समय उनके निजी सहायक लाल बत्ती लगी हुई एक वाहन पर सवार होकर समस्तीपुर जिले में राशि उगाही करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए थे। उस समय भी मांझी के निजी सहायक को हटाया गया था। उन्होंने कहा कि मांझी पर शिक्षा घोटाला का भी आरोप लगा था।

मोदी ने कहा कि हाल के दिनों में मांझी और नीतीश कुमार के बीच रिश्ते अच्छे नहीं हैं। इसी को लेकर नीतीश कुमार के करीबी नेताओं ने मांझी के शपथ पत्र को सार्वजनिक कर दिया है। उन्होंने कहा कि इससे नीतीश के करीबी नेता मांझी पर इस्तीफा देने का दवाब बना सकेंगे। पूर्व उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों के दौरान जदयू के वरिष्ठ नेता और पथ निर्माण मंत्री ललन सिंह के नेतृत्व में पार्टी के बारह मंत्री दिल्ली में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव से भेंट की थी। जदयू के नेता पूर्व मुख्यमंत्री कुमार के पक्ष में पार्टी के अंदर माहौल बनाने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश और मांझी के बीच चल रहे आपसी विवाद के कारण बिहार का विकास बाधित हो रहा है। मोदी ने कहा कि जब से मांझी मुख्यमंत्री के पद पर है कभी भी नीतीश ने उनकी प्रशंसा नहीं की है। फिर से मुख्यमंत्री बनने के लिए नीतीश लालायित हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद से नीतीश जब भी किसी यात्रा पर जाते हैं, तब गठबंधन सरकार की उपलब्धियों को ही गिनाते हैं। जदयू सरकार की उपलब्धियों गिनाने के लिए उनके पास कुछ भी नहीं है।

मांझी और नीतीश के