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नीतीश ने खुद खोदी जदयू की कब्र : नंदकिशोर
बिहार में भी बनेगी अब एनडीए की सरकार : उपेंद्र
बिहार में जदयू दो खेमों में बंट गया है : पासवान
एजेंसी|पटना
रविवारकी दोपहर श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम जमुई में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन का उद्घाटन रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने किया। इस मौके पर कुशवाहा ने कहा कि जदयू के अंदर सिर फुटौव्वल की स्थिति बनी हुई है। नीतीश जी को कभी यह बर्दाश्त नहीं हो सकती है कि कोई अति पिछड़ा, दलित, महादलित परिवार का व्यक्ति राजनीति में उनसे आगे निकले। उनकी कोई राजनीति चले यह नीतीश जी को बर्दाश्त नहीं है। जीतन राम मांझी को सत्ता थमा कर नीतीश कुमार एक रबर स्टांप की तरह काम करना चाहते थे, लेकिन स्वाभिमानी व्यक्ति हैं मांझी। जिन्होंने अपने स्वाभिमान के साथ समझौता नहीं किया। आज नीतीश का असली चेहरा आम लोगों के सामने गया है। दलित, महादलित, अति पिछड़ा व्यक्ति पिछलग्गू बन कर चले तो बहुत अच्छा, लेकिन यदि वह अगुआ बन जाए तो नीतीश कुमार को बर्दाश्त नहीं होता है। इसीलिए वे लग गए मांझी को बर्बाद करने में। यह सब मामला उनकी पार्टी का मामला है, मैं ज्यादा कुछ नहीं बोलूंगा। बस इतना ही कहूंगा, आज बिहार की जग हंसाई हो रही है।
अब जनता ने नब्ज पहचान लिया है और नीतीश जी अब दुबारा राज की गद्दी पर आने का सपना छोड़ दें।
मांझी जी ने विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव दे ही दिया है मै तो कहूंगा नीतीश जी आप भी उसका समर्थन कर चुनाव करा दें और जनता का फैसला देख लें। आप कहीं नजर नहीं आएंगे। जनता आप को दूध में गिरी मक्खी की तरह इस बार फेंक देने वाली है।
उन्होंने कहा कि झाझा में केंद्रीय विद्यालय खोलने की बात चल रही है। हमारा वादा है जहां-जहां राज्य सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी वहां वहां केंद्रीय विद्यालय खोला जाएगा। राज्य सरकार को विकास से सरोकार नहीं है। यह मात्र अपनी सत्ता के पीछे चल रही है। राज्य में कई प्राइमरी स्कूल बिना बिल्डिंग के ही चल रही है। लोगों की अपेक्षा प्रधानमंत्री से है और प्रधानमंत्री कार्य भी करना चाहते हैं लेकिन दिल्ली से वे कबतक आम लोगों की अपेक्षा कर सकते हैं। राज्य सरकार सहयोग नहीं कर रही है। इसलिए कहता हूं दिल्ली में भी एनडीए की सरकार और बिहार में भी एनडीए की सरकार। दिल्ली में बैठ कर योजना बनती है और उसे पूरा करने के लिए राज्य सरकार को पैसा भी दिया जा रहा है लेकिन पैसा खर्च नहीं हो पाता है और वापस चला जाता है। और कई बार खर्च होता भी है तो भ्रष्टाचार के द्वारा किसी की जेब में चल जाती है जमीन पर कार्य नहीं होता है और विकास काम ठप हो जाता है। दिल्ली के द्वारा बिहार के विकास में बाधा बिहार में बैठे लोग हैं। इस मौके पर कई रालोसपा के नेता, सदस्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
फोटो: श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम जमुई में कार्यकर्ता सम्मेलन मे उपस्थित उपेंद्र कुशवाहा
पटना| पार्टीप्रदेश कार्यालय में अायोजित मिलन समारोह के दौरान मंगल पांडेय और दूसरे पार्टियों से आए नेता और कार्यकर्ता।
पटना | भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय ने नीतीश कुमार पर राज्य में राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि महादलित कार्ड खेलकर जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाने का उन्होंने सिर्फ नाटक किया था। कुर्सी मोह उनकी पुरानी आदत है। इसीलिए मांझी को हटाकर मुख्यमंत्री बनने के लिए छटपटाहट उनमें फिर से पैदा हो गई है। जीतनराम मांझी जब दल के नेता हैं तो फिर नीतीश कुमार जदयू विधायक दल के नेता कैसे बन सकते हैं? दरअसल महादलित मुख्यमंत्री को पहले तो नीतीश ने रिमोट से चलाया, नचाया और बाद में जब सीएम मांझी सख्त हुए तो अपने समर्थकों से उन्हें अपमानित करवाना शुरू करवा दिया। पांडेय रविवार को पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मंगल पांडेय ने बिहार में राजनीतिक अस्थिरता के लिए नीतीश को जिम्मेवार ठहराया
पॉलिटिकल रिपोर्टर|पटना
विधानसभामें विपक्ष के नेता नंदकिशोर यादव ने कहा कि जदयू में आग नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद के साथ मिलकर लगाई है और आरोप भाजपा पर लगा रहे हैं। नीतीश जदयू का आंतरिक लोकतंत्र खत्म कर चुका है। लालू से हाथ मिलाने पर जदयू में विद्रोह की आग लगी हुई थी जो महादलित सीएम को अपमानित कर नीतीश के खुद सीएम बनने की साजिश से और भड़क गई है। बिहार में राजद के समर्थन से चल रही जदयू सरकार की अंदरूनी उठापटक ने सबकुछ ठप कर रखा है।
जदयू-राजद सुप्रीमो की तानाशाही का खामियाजा बिहार की बर्बादी के रूप में सामने रहा है। ठीकरा भाजपा पर फोड़ रहे हैं। पटना में निवेश की संभावनाओं को तलाशने के लिए ग्लोबल मीट चल रहा है, लेकिन जदयू के तमाम नेता मंत्री, मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं तलाशने में जुटे हैं। पालीगंज में सोन नदी का बांध टूटने से किसानों के खेतों में पानी घुस आया है। सैकड़ों एकड़ रबी की फसल बर्बाद हो गई है। भारी तबाही हुई है, लेकिन सत्तापक्ष अपनी बर्बादी को संभालने में ही व्यस्त हैं।