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जिसकी कमीज उजली चुनाव में उसकी जीत

6 वर्ष पहले
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दिल्ली चुनाव में ‘आप’ की राजनीतिक शैली की जीत हुई है। जो राजनीतिक पंडित और नेतागण इसे नरेंद्र मोदी और किरण बेदी की हार बता रहे हैं, वे इसका सतही आकलन ही कर रहे हैं। दिल्ली के अधिकतर मतदाताओं ने ‘आप’ के इस वादे पर भरोसा किया कि वह भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाएगी और वीवीआईपी संस्कृति से दूर रहेगी। याद रहे कि अपने जन्म काल से ही ‘आप’ ने अपने काम और व्यवहार से यह साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार के साथ उसकी शून्य सहनशीलता है। जो राजनीतिक पंडित ‘आप’ की भारी जीत के अन्य कारण गिना रहे हैं, उन्हें भ्रष्टाचार के वास्तविक कुपरिणामों का पता नहीं है। लोकसभा चुनाव में यदि नरेंद्र मोदी राजग को भारी जीत दिला पाए तो उसका भी प्रमुख कारण यही था कि लोग मनमोहन सरकार के महा घोटालों से चिंतित थे। ग्रासरूट स्तर पर भी लोग पुलिस और प्रशासन के भारी भ्रष्टाचार से परेशान रहे हैं। चूंकि नरेंद्र मोदी की इन मामलों में साख बेहतर है, इसलिए उन्हें जनता का समर्थन मिला। 2014 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की जगह ‘आप’ जैसी कोई साख वाली पार्टी होती तो शायद एनडीए की सरकार केंद्र में नहीं बन पाती। मनमोहन सरकार की कमीज से नरेंद्र मोदी की कमीज जनता को काफी उजली लगी। गत दिसंबर में अब्दुल्ला परिवार और सोरेन परिवार की कमीजें मोदी की कमीज से अधिक उजली भला किसे लग सकती थी? दिल्ली में केजरीवाल के 49 दिनों के शासनकाल में दिल्ली के लोगों ने यह महसूस किया कि शासन के भ्रष्टाचार में चमत्कारिक रूप से कमी गई थी। केंद्र में मोदी सरकार बन जाने के बावजूद दिल्ली के भाजपानीत म्युनिसिपल काॅरपोरशन के भ्रष्टाचार में आज भी कोई कमी नहीं आई। यहां तक कि केंद्र सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार की व्यापकता के अनुपात में मोदी सरकार उससे उतनी ही कठोरता से लड़ती नजर नहीं आई।

(लेखक,दैनिक भास्कर पटना के एडिटोरियल एडवाइजर हैं।)

सुरेंद्र किशोर