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मनुष्य जीवन योग साधना के लिए है : आचार्य निर्मोहानंद

5 वर्ष पहले
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पहले दिन आनंदमार्गियों ने मनाया नीलकंठ दिवस, विचार पंचिका आज

भास्कर न्यूज|रामगढ़

आनंदमार्ग प्रचारक संघ के तत्वावधान में शुक्रवार को पतरातू बस्ती (बैंक काॅलोनी) स्थित लक्ष्मण प्रजापति के आवास पर तीन दिवसीय सेमिनार का शुभारंभ किया गया। सेमिनार के शुभारंभ से पूर्व आनंदमार्गियों ने शहर में प्रभात फेरी निकाली। इसके बाद आचार्य निर्मोहानंद और अविनिंदानंद महाराज ने श्री श्री आनंदमूर्ति के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर और दीप जलाकर सेमिनार का शुभारंभ किया। सेमिनार के शुभारंभ से पूर्व आचार्य ने आनंदमार्गियों को बताया कि आज के दिन को सभी आनंदमार्गी नीलकंठ दिवस के रूप में मनाते हैं।

उन्होंने श्री श्री आनंदमूर्ति जी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए आनंदमार्गियों से कहा कि 12 फरवरी 1973 को पटना के बांकीपुर सेंट्रल जेल में डॉक्टरों ने उन्हें दवा के बदले जहर देकर मारने का प्रयास किया। इसपर उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि आप अपनी ड्यूटी निभाएं। डॉक्टरों द्वारा जहर भरा इंजेक्शन देने के बाद उनका पूरा शरीर भगवान शिव की तरह नीला हो गया। जिसके फलस्वरूप आनंदमार्गी इस दिन को नीलकंठ दिवस के रूप में मनाते हैं। सेमिनार के दौरान उन्होंने अपने प्रवचन में आनंदमार्गियों से कहा कि मनुष्य का शरीर योग साधना के लिए बना है। जिसके कारण योग को विशेष प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। शिविर में आनंदमार्गियों के बीच जल चिकित्सा और योग आसन के आचार्य ब्रहाबुद्ध्यानंद अवधूत, आचार्य अवनिंदानंद, आचार्य सुखदेवानंद अवधूत, आचार्य श्रगानंद अवधूत, आचार्य परवेदानंद के अलावा कई आनंदमार्गी शामिल हुए। पहले दिन के सेमिनार में सुरेश प्रसाद कुशवाहा, भोला चौधरी, गोरांग राय, किशन शर्मा, सुनील अग्रवाल, कालीचरण, रामलड्डु पांडेय, कमलावती, रीता देवी, मंटू देवी, शिवकुमारी सहित कई आनंदमार्गी शामिल थे।

सम्मेलन के दौरान प्रवचन देते आचार्य निर्मोहानंद।

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