जर्जर खपरैल भवन में चल रहा थाना
स्थापनासे लेकर अबतक परसन थाना एक अदद भवन के लिए तरस रहा है। 1982 में इसकी स्थापना एक कच्चे खपरैल मकान में हुई। तब से लेकर आजतक करीब 34 वर्ष गुजरने के बाद भी इस थाना को एक पक्का मकान उपलब्ध नहीं हो सका है। इसका संचालन आज भी उसी तरह एक खपरैल मकान में हो रहा है।
इसके कमरे भी इतनी जर्जर हो गई है कि पुलिस भयभीत रहती है। बताते हैं कि यहां ओपी भवन बनने के लिए कई बार वरीय अधिकारियों का निरीक्षण हो चुका है। लेकिन इसके बाद भी आजतक भवन का निर्माण नहीं हो पाया।
^थाना के लिए भवन निर्माण जरूरी है। लेकिन इसका फैसला विभाग के वरीय अधिकारी ही ले सकते हैं। इसके लिए प्रतिवेदन भेजा गया है। सरकारी आदेश मिलते ही भवन का निर्माण हो जाएगा।\\\'\\\' अंजनकुमार, थाना प्रभारी, परसन ओपी, राजधनवार, गिरिडीह
^परसन थाना झारखंडधाम जैसे प्रसिद्ध स्थल को सुरक्षा प्रदान करता है। लेकिन इनके पास रहने के लिए कोई भवन नहीं है। परसन ओपी के लिए थाना भवन और चहारदीवारी निर्माण होना आवश्यक है। इसके लिए जिला प्रशासन और वरीय अधिकारियों को पहल करनी चाहिए। तत्काल इसपर पहल नहीं होने पर वे अपने स्तर से जिला प्रशासन को पत्र लिखकर अवगत कराएंगे।\\\'\\\' रामदेवयादव, मुखिया प्रतिनिधि, परसन पंचायत
चहारदीवारी का भी है अभाव
यहांके कच्चे थाना भवन के चारों ओर खुला स्थान होने से भी संकट है। पुशओं का आना-जाना लगा रहता है। चहारदीवारी का निर्माण नहीं होने से देर से थाना की हर गतिविधि झलकती है। थाना परिसर सड़क से करीब दो फीट नीचे गड्ढे से तब्दील हो गया है। जिससे बरसात में जलजमाव हो जाता है।
प्रशासनिक उदासीनता का है शिकार
प्रशासनिकउदासीनता का शिकार परसन थाना गर्मी के मौसम में धूल कण से भरा रहता है, तो दूसरी तरफ बरसात में छत से पानी के टपकने से दस्तावेजों को सहेजकर रखने में संकट होता है। अासपास जमा बरसात के कचरे से भी परेशानी होती है। बरसात में वहां बैठने के लिए स्थान नहीं मिल पाता है। जिससे आगंतुकों को भी परेशानी होती है। जिला मुख्यालय से सुदूर क्षेत्र होने के कारण इस कच्चे भवन में रहकर पुलिसकर्मी असुरक्षित महसूस करते हैं।