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ठंड में रैन बसेरा बंद, ठिठुर रहे हैं गरीब

7 वर्ष पहले
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फुटपाथपर जिंदगी बिताने वाले असहाय, गरीबों को कड़ाके की ठंड में रैन बसेरा का छत भी नहीं मिल रही है। वहीं, अलाव की व्यवस्था नहीं होने से भी ठंड की रात में गरीब ठिठुर रहे हैं। कोहरे और बादल से ठंड बढ़ती जा रही है। इससे, गरीबों की जान पर आफत बनी हुई है। लेकिन, अब तक प्रशासन और छावनी परिषद की ओर से बंद पड़े रैन बसेरा को खुलवाने और अलाव की व्यवस्था कराने को लेकर कोई पहल नहीं की गई है। ऐसे में गरीबों के लिए ठंड मौत का सबब बन रही है।

चौकचौराहों पर अलाव की व्यवस्था नहीं

प्रशासनके साथ छावनी परिषद की ओर से शहर के चौक चौराहों पर अलाव की व्यवस्था कराई जाती रही है। लेकिन, ठंड बढ़ती जा रही है, पर अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है। लोग कचरों को जलाकर ठंड से बच रहे हैं।

इस संबंध में रामगढ़ अंचलाधिकारी कुंवर सिंह पाहन ने कहा कि रैना बसेरा को खुलवाने के लिए कैंटोनमेंट के सीईओ से बातचीत की जाएगी। वहीं, चौक-चौराहों पर अलाव जलाने की व्यवस्था की जा रही है। एक-दो दिनों में सारी व्यवस्था कर दी जाएगी।

रैन बसेरा में लटक रहा ताला

छावनीपरिषद की ओर से सार्वजनिक अस्पताल के पास रैन बसेरा बनाया गया है। यहां, गरीबों के सोने की व्यवस्था की गई। अब, इस बसेरा में ताला लटक रहा है। गांवों से दिहाड़ी मजदूर काम करने के लिए शहर आते हैं। दिन भर काम करने के बाद वाहन नहीं मिलने पर मजदूरों को सड़क पर रात बितानी पड़ती है। ठंड से बचने के लिए मजदूरों के अलावा रिक्शा वाले रात जग्गा करने, सड़क किनारे और दुकानों के बाहर सोने को विवश हैं। गरीबों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में रैन बसेरा का उद्देश्य अधर में लटक रहा है।

बंद पड़ा रैन बसेरा।

रिक्शा पर सोया रिक्शावाला।