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नि:स्वार्थ भाव से पढ़ा रहे हैं अशोक मिश्र

7 वर्ष पहले
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उनके शिक्षा दान से ही मैं शिक्षक बना हूं : शैलेंद्र

सरस्वतीविद्या मंदिर, रामगढ़ के हिंदी विभाग के शिक्षक शैलेंद्र कुमार कहते हैं कि अशोक सर ने मुझे जो निशुल्क शिक्षा दान में दिया है, वो मैं कभी भूल नहीं सकता। मेरे जैसे कई छात्रों का भविष्य सर ने बनाया है। आज मैं शिक्षक अशोक सर के बदौलत ही बन पाया हूं। रामगढ़ कॉलेज में बीए पार्ट 3 की छात्रा पूजा कुमारी, सुनीता कुमारी, नेहा कुमारी कहती हैं कि अशोक सर निस्वार्थ भाव से पढ़ाते हैं। कोचिंग में या अन्य जगहों पर फीस इतनी ज्यादा है कि हमारे अभिभावकों को सोचना पड़ जाता है, लेकिन अशोक सर का कोई निश्चित फीस निर्धारित नहीं है। गरीब छात्रों से कुछ भी नहीं लेते हैं।

छात्राओं को पढ़ाते अशोक मिश्र।

भास्कर न्यूज | रामगढ़

दोटूक में कहें तो आज शिक्षा का शुद्ध व्यवसायीकरण हो गया है। खासकर उच्च शिक्षा काफी महंगी हो चली है। मध्यमवर्गीय परिवार छोटे बच्चों को ट्यूशन देने में सोचता है। कॉलेज का ट्यूशन पैकेज बजट गड़बड़ा देता है। ऐसे परिवेश में रामगढ़ (पतरातू बस्ती) के 70 वर्षीय अशोक मिश्र निस्वार्थ भाव से कॉलेज के छात्रों को पढ़ाने में लगे हैं। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के बावजूद छात्रों को पढ़ाने के एवज में कोई निश्चित रकम नहीं लेते हैं। छात्रों ने जो भी दिया ले लिया। गरीब और जरूरतमंद छात्रों से ये कुछ भी नहीं लेते हैं। साहित्य के प्रति इनकी काफी रुचि है। साहित्य साधना मंच के बैनर तले जिले के विभिन्न स्कूलों में लगातार साहित्यिक प्रतियोगिता आयोजित कराते हैं। विजेता छात्रों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करते हैं, ताकि छात्रों में साहित्य के प्रति रुझान बढ़ सके। घर में ही पुस्तकों का संग्रह रखा है। जरूरतमंद छात्रों को अपनी किताब पढ़ने को भी देते हैं। मिश्र रामगढ़ कॉलेज में बतौर लाइब्रेरियन पद पर कार्यरत थे। 1977 में कॉलेज में हुए आर्थिक घोटाले को इन्होंने उठाया। बदले में इनका तबादला चतरा कॉलेज कर दिया गया, लेकिन वे अपने जिद से चतरा कॉलेज नहीं गए। बल्कि इस गलत फैसले के खिलाफ कोर्ट चले गए। आज भी ये अपनी इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं।

शहरमें ज्ञान वर्धक पुस्तकालय खुलवाने का है सपना

अशोकमिश्र कहते हैं कि आज की पीढ़ी से जयशंकर प्रसाद, निराला, अमीर खुसरो, विद्यापति आदि साहित्यकारों के बारे में पूछ देने पर वह अगल-बगल झांकने लगते हैं। यह कष्टकारी ह