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डिस्टर्ब मत करो, तसीली लगे हैं

7 वर्ष पहले
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अस्त-व्यस्तललउवा अपने पैंट के कभी इस पॉकेट में तो कभी उस पॉकेट में हाथ डालकर नोट निकालता, बुदबुदाते हुए कुछ जोड़ता, फिर माथा झटककर कमीज वाले पॉकेट से नोट निकालता। अपने बाइक का डिक्की खोलकर उसमें कुछ तलाशता, फिर असंतुष्ट अंदाज में मोबाइल निकालकर किसी का नंबर मिलाने लगता। फलनवा यह देखकर पूछता है : क्या बात है, बहुत परेशान दिख रहे हो। कहता है ललउवा : अरे नहीं यार, दुर्गा पूजा को लेकर परिपार्टी के अनुसार तसीली अभियान में लगा हूं। स्क्रैप वाले का पैसा दाहिने पॉकेट में डाला था, कोयला वाले का पैसा बाएं पॉकेट में रखा था, फैक्ट्री वालों का पैसा पिछले पॉकेट में था। क्रेशर ईंट भट्ठों वालों का पैसा किधर रख दिया, पता ही नहीं चल रहा है। पूछने पर कहते हैं कि इतना दिया था। जोड़ते हैं तो कम होता है। पॉकेट में सभी तरह के लोगों का पैसा है।

अब कौन कम दे दिया कैसे पता चलेगा। इसमें खाकी वर्दी, खादी वर्दी, कलमघिसुवा, झंडीमार रंगबाज, क्रिमनल लगभग सभी के यहां चढ़ावा पहुंचता है। पूजा में इसकी टॉप टू बॉटम किसको जरूरत नहीं है। ऐसे में तुम बेवकूफी का झुनझुना बजाना चाहते हो, तो बजाओ, ललउवा तो सिर्फ समझा ही सकता है। तो दोस्तों जो अभी तक तसीली अभियान शुरु नहीं किए हैं, वो तुरंत शुरु कर दे, क्योंकि समय बहुत कम है। जोहार…