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घनी आबादी के बीच आयरन ओर ट्रांसपोर्टिंग की तैयारी

5 वर्ष पहले
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तीसरे दिन खाली हुआ कुजू साइडिंग में स्पंज आयरन रैक

कुजू| कुजूरेलवे साइडिंग में स्पंज आयरन रैक अनलोडिंग का विवाद आपसी सहमति के बाद बुधवार को समाप्त कर दिया गया। इसके बाद तीन दिनों से खड़ी 59 बोगियों में लदी स्पंज आयरन रैक को अनलोड कराया गया। मंगलवार की देर शाम ठेकेदार पक्ष और आंदोलनकारियों के बीच वाईआरसी क्लब कुजू में घंटों हुई वार्ता में तनावपूर्ण मामले को आपसी सहमति के बाद सुलझाया गया। वार्ता में दोनों पक्षों के बीच पहले कुछ देर तक तनातनी दिखी। जिसके बाद आंदोलनकारियों की मांग को देखते हुए ठेकेदार ने कहा कि प्रदूषण सभी के लिए नुकसान देह है। वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के बीच इस बार आए रैक को खाली कराने पर सहमति जताई गई। वार्ता में ठेकेदार पक्ष के बैजनाथ प्रसाद गुप्ता, शिबू प्रसाद, प्रेम प्रसाद, मुकेश प्रसाद साहू, मनीष प्रसाद, संजय मंडल, अरविंद साहू, शिवा मेहता आदि और आंदोलनकारियों की ओर से अनिल सिंह, श्रवण सिंह, बालेश्वर शर्मा, बालमुकुंद सिंह, चंदन सिंह आदि मौजूद थे।

पूर्वसासंद ने साइडिंग हटवाने का दिया अाश्वासन : आंदोलनरतमहिलाओं ने मंगलवार की देर शाम सैकड़ो की संख्या में हजारीबाग के सांसद जयंत सिन्हा से डेमोटांड़ उनके आवास पर मिलीं। जहां उनकी गैर मौजूदगी में उनके पिता सह पूर्व सांसद यशवंत सिन्हा से मुलाकात की। महिलाओं की मांग पर पूर्व सांसद ने धनबाद डीआरएम को फोन कर साइडिंग हटवाने की बात कही।

आवासीय कॉलोनी के बीच कुजू रेलवे स्टेशन, यहीं होनी है आयरन ओर की ट्रांसपोर्टिंग।

{महिलाओं ने मंगलवार को ट्रांसपोर्टिंग रोकने के लिए एसडीओ को दिया था ज्ञापन

{ आयरन ओर के डस्ट से कई बीमारियां फैलने की आशंका, डरे हैं लोग

दिलीपकुमार सिंह | कुजू

कुजूरेलवे साइडिंग से कोयले के बाद अब लौह अयस्क की भी लोडिंग-अनलोडिंग शुरू हो रही है। इससे परेशान कुजूवासियों का कहना है कि प्रधानमंत्री एक ओर लोगों के स्वास्थ्य के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं चला रहे हैं। वहीं रेलवे विभाग लोगों को नई-नई बीमारियां देने का काम कर रहा है। यहां घनी आबादी के बीच रेलवे साइडिंग स्थित है, जहां आयरन ओर से लदी एक मालगाड़ी खड़ी है।

इसे अनलोड करने देने के लिए पिछले तीन दिनों से यहां के लोग अड़े हुए हैं। यहां की महिलाओं ने इस संबंध में मंगलवार को रामगढ़ एसडीओ को ज्ञापन भी सौंपा है। हालांकि प्रशासन का रवैया इस संबंध में नकारात्मक दिख रहा है, जिससे हजारों की आबादी को अपने भविष्य की चिंता गहराने लगी है।

खोखलासाबित हुआ रेलवे प्रबंधन का अाश्वासन

नबंवर2011 से कुजू के निर्माणाधीन स्टेशन पर कोयले की रैक लोडिंग अनलोडिंग का कार्य शुरू कराया गया था। उस समय स्थानीय ग्रामीणों ने इसका विरोध किया गया था। जिस पर वहां कार्य करा रहे रेलवे अधिकारियों ने ग्रामीणों को मौखिक आश्वासन दिया था, कि कुजू रेलवे स्टेशन चालू होते ही साइडिंग का कार्य स्टेशन से दूर अन्यत्र स्थानांतरित किया जाएगा। ग्रामीणों द्वारा इस बीच कई बार साइडिंग को स्टेशन परिसर से दूर करने के लिए विरोध किया जाता रहा, लेकिन अधिकारियों का आश्वासन खोखला साबित हुआ और यहां रैक लोडिंग-अनलोडिंग ने ग्रामीणों को केवल आश्वासन देने का काम किया और मामले को दबा दिया।

स्टेशनसे 2 किमी दूरी पर है साइडिग के लिए उपयुक्त जगह

रेलवेविभाग के पास आबादी से हटकर कुजू रेलवे स्टेशन से महज दो किलोमीटर की दूरी पर दोनाें ओर उपयुक्त स्थान खाली है, जहां साइडिंग शुरू कर लौह अयस्क कोयला की ट्रांसपोर्टिंग सुचारू ढंग से की जा सकती है।

आयरनडस्ट से हो सकती है कई बीमारी : डॉ. केएन प्रसाद

जिलायक्ष्मा पदाधिकारी केएन प्रसाद ने दूरभाष पर बताया कि डस्ट से दमा, निमोनिया, खांसी, टीबी आदि बीमारी होती है। फसल समेत आसपास का वायुमंडल प्रदूषित होगा। इससे बचाव का कोई विशेष उपाय नहीं है। फैक्ट्री में तो मशीन लगाकर प्रदूषण को रोका जा सकता है। परंतु साइडिंग के प्रदूषण को रोकना असंभव है।

कुजूस्टेशन चालू होने के बाद भी नहीं हटी साइडिंग

रेलवेविभाग द्वारा गत 7 दिसंबर 2016 को सवारी वाहन चलाकर कुजू स्टेशन को चालू किया गया। इसके बाद भी स्टेशन पर रेलवे साइडिंग में कोयला लोडिंग और अनलोडिंग कार्य जारी है। बल्कि कोयले की साइडिंग हटाने की बजाए 19 दिसंबर 2016 से रेलवे विभाग द्वारा स्पंज आयरन से लदा रैक भेज दिया गया। पहले ही कोयले के प्रदूषण से त्रस्त ग्रामीणों को स्पंज आयरन की ट्रांस्पोर्टिंग से स्वास्थ्य संबंधी खतरा बढ़ गया है। जिससे ग्रामीण अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है। ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री सुरेश प्रभु से मार्मिक शब्दाें में गुहार लगाई है।

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