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मलेरिया पीडि़तों का किया जा रहा है ब्लड टेस्ट
प्रखंडमें मलेरिया का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है। डॉ. एमके दास के नेतृत्व में नेशनल इंस्टीच्युट ऑफ मलेरिया रिसर्च सेंटर नई दिल्ली की टीम पिछले पांच दिनों से प्रखंड के विभिन्न गांवों में घर-घर पहुंचकर ब्लड टेस्ट पीड़ितों का इलाज कर रही है। अब तक यह टीम पुरानडीह, सोहर, कुरूंद, कुकुदपाट, चीरोपाट, ओरसापाट, कोरगी, मौनाडीह, दौना, छेगराही, नयना, आधे आदि गांवों में पहुंचकर ब्लड टेस्ट कर दवाएं दे चुका है। डॉ. दास बताते हैं कि जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा डीडीटी का किया जा रहा छिड़काव बेअसर है।
उन्होंने छिड़काव किए डीडीटी पाउडर के ही विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए लेबोरेट्री में जांच की बात कही। उन्होंने बताया कि अब तक २५० से अधिक मलेरिया पॉजीटिव के रोगी पाए गए हैं, जिनका इलाज किया है। टीम के सदस्यों द्वारा मच्छर पकड़ा जा रहा है, वहीं जलाशयों का जल संग्रह कर नमूना भी तैयार किया जा रहा है। गौरतलब हो कि प्रखंड पुरानडीह गांव में आदिम जनजातीय समुदाय के छह बच्चों की मौत के बाद राज्य मलेरिया विभाग द्वारा यह टीम भेजी गई है। जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है। जिस सदर अस्पताल से मलेरिया डायरिया के रोगी रेफर किए जाएं, उसकी व्यवस्था की पोल खुद ही खुल जाती है। केंद्रीय टीमें में डॉ. दास के अलावा विजय ओम, आर शुक्ला, आरके पांडेय, हेरमन मिंज, तृष्णा, आरबी, जेपी पांडेय शामिल हैं, जिन्हें सीएचसी महुआडांड़ का कोई सहयोग नहीं मिल रहा है।