पारसनाथ एक्शन प्लान के तहत किए जा रहे कार्य
पारसनाथ की अंतिम चोटी
अंतिम सड़क तक पहुंचने के लिए लेनी पड़ती है नक्सली संगठनों से अनुमित
पारसनाथजैनियों का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, जो देश ही नहीं वैश्विक पटल पर भी जाना जाता है। इस लिहाज से यहां चल रही नक्सल गतिविधियां बरबस ही ध्यान खींचने वाली साबित होती रही हैं। पारसनाथ पहाड़ और इसकी तराई में नक्सली संगठनों के प्रभाव का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि पारसनाथ की अंतिम चोटी से होकर गुजरने वाली सड़क में बिना नक्सलियों की अनुमित के प्रवेश वर्जित है। राज्य सरकार ने यहां से नक्सलियों के प्रभाव को समाप्त करने के लिए पिछले साल पारसनाथ एक्शन प्लान की शुरुआत की है। नक्सली जी जान से इस ऑपरेशन का विरोध कर रहे हैं। कुल मिलाकर यह कि लंबे समय से पारसनाथ नक्सलियों के कब्जे में है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में ये सारी सच्चाई सामने आई है। गौरतलब है कि 16 जनवरी 2005 को सरिया के दुर्गी में विधायक महेंद्र सिंह की हत्या कर दी गई थी। फिर इसी वर्ष 11 सितंबर को भेलवाघाटी में हुआ नरसंहार, जिसमें ग्राम रक्षा दल के 17 लोग नक्सलियों के हाथों मारे गए थे। आए दिन कहीं नक्सली दस्तों की ट्रेनिंग की सूचना मिलती है तो कहीं से से बंकर और हथियार छिपाकर मिलने की सूचना।
ग्वालियर के पंडितअजीत शास्त्री काकहना है कि वे अब तक 37 बाद पर्वत वंदना कर चुके हैं। 1997 तक वे सड़क परिवहन मार्ग से पारसनाथ आए। अब पहले जैसा माहौल नहीं है।
इसके बाद पता चला कि नक्सलियों ने इस मार्ग को बंद कर दिया है। लेकिन भगवान के प्रति आस्था है, पैदल पहुंचते हैं। लेकिन ये भी जाहिर है कि नक्सलियों के आगे यहां की सरकार पंगु बन चुकी है। अन्यथा ये सड़क अब तक चालू हो गई होती।
गांधीनगर की मनोरमाजैन नेबताया कि 1994 तक चार पहिया वाहन से पारसनाथ पहाड़ पहुंचे हैं। जिससे काफी आसानी होती थी। पर अब यहां खौफ का आलम है।
यात्रियों ने अपनी पीड़ा सुनाई
कभी लोग बेखौफ होकर भ्रमण करते थे
पारसनाथकी चोटी पर 1998 तक यहां सड़क परिवहन की व्यवस्था थी। जिसके सहारे लोग आसानी से भगवान महावीर की पूजा कर लौट आते थे। चार पहिया वाहन सीधा डाकबंगला तक पहुंचती थी। यहां लोग कभी बेखौफ पैदल अथवा डोली से मंदिरों का भ्रमण करते थे। लेकिन बाद में नक्सलियों ने मार्ग बंद कर दिया।
हर दिन होता है करोड़ों का कोराबार
पारसनाथमें पूरे विश्व से श्रद्धालु आते हैं। यहां हर दिन करोड़ों का कारोबार होता है। जल मंदिर सहित कई टोंक पर हर दिन पहली दूसरी पूजा की डाक होती है। जिसकी बोली सबसे अधिक होती है वही यहां पहला पूजा करते हैं। पहली पूजा की सर्वाधिक बोली 12 लाख रुपए लग चुकी है।
नक्सलियों पर होगी चौतरफा कार्रवाई : आईजी
पारसनाथसे नक्सलियों का सफाया तय है। घेराबंदी कर चौतरफा कार्रवाई शुरू कर दी गई है। धनबाद, गिरिडीह, बोकारो हजारीबाग जिले के सीआरपीएफ जैप के जवान एक साथ हमला करेंगे। पारसनाथ में छुपे नक्सलियों को कहीं भागने की भी जगह नहीं मिलेगी। फिलहाल पारसनाथ एक्शन प्लान के तहत विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने के साथ-साथ नक्सल मुक्त पारसनाथ बनाना पहला एजेंडा है।’’ तदाशामिश्रा, जोनल आईजी, बोकारो प्रक्षेत्र
पारसनाथ एक्शन प्लान की खिलाफत कर रहे नक्सली
1 पारसनाथ स्टेशन से मधुबन तक यात्री वाहनों के लिए स्कॉट की व्यवस्था की गई है।
2 धावाटांड़-लटकटोमें पुलिस पिकेट बना है।
3मधुबन ओपी को थाने में परिवर्तित किया गया है।
4 धावाटांड़-जोभी-पीपराडीह(7.2 किमी) पथ का निर्माण 3 करोड़ 43 लाख की लागत से की जा रही है।
5पीपराडीह से बदगावां 3.25 किलोमीटर पथ का निर्माण 1 करोड़ 94 लाख की लागत से की जा रही है।
6 मधुबनसे पहाड़ तली तक 68 लाख लाख 1500 फीट रिंग रोड (पीसीसी) का निर्माण
7पालगंजसे बोनासिंगा तक 4 करोड़ 36 लाख की लागत से 20 किलोमीटर पथ का निर्माण पूर्ण।
8केवी मोड़ से नारायणपुर तक 25 करोड़ 14 लाख की लागत से 19.7 किलोमीटर पथ निर्माण की निविदा निष्पादित की गई है।
9 चिरकीसे राजगंज तक 7 करोड़ 54 लाख की लागत से सड़क निर्माण की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।
10पारसनाथ विकास प्रक्षेत्र के अंतर्गत चयनित 30 गावों में युद्ध स्तर पर चापाकल निर्माण मरम्मति चल रही है।
पोस्टमार्टम हो जाएगा
दैनिकभास्कर की टीम मंगलवार पारसनाथ पहुंची। पुराने खंडहर के बगल से गुजरे करीब 15 फीट के चौड़े रास्ते में ज्योंही जाने लगा कि पीछे से आवाज आती है, ठहर जाइए। पीछे देखते ही दो शख्स (डोली संचालक) दौड़ा रहा था। सब कुछ जानते हुए भी अनजान बन पूछा क्या बात है। बोला इधर मत जाइए। क्यों, फिर कहता है बोले मत जाइए। इस रास्ते से जाने वाला वापस लौटकर नहीं आता है। क्या होगा, पोस्टमार्टम हो जाएगा। फिर उसे पत्रकार होने का परिचय दिया। तब भी उसने मना किया।