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गजराज नेे ली तांत्रिक की जान

7 वर्ष पहले
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जबपरेशानी या समस्या से मुक्ति का कोई रास्ता नहीं दिखता है, तो लोग तंत्र-मंत्र का सहारा लेते हैं। लेकिन, हाथियों के उत्पात से परेशान जारापीड़ी गांव के ग्रामीणों को यह सहारा भी नहीं रहा। अंधविश्वास ने उसकी भी जान ले ली। जंगली हाथियों को खदेड़ देने का दावा करने वाले कथित तांत्रिक सुखराम मुंडा को एक विशालकाय हाथी ने पैरों से कुचल कर मार डाला। साथ के अन्य दो लोगों ने भाग कर अपनी जान बचाई। घटना सोमवार शाम की है। पटमदा थाना के लाऊजोड़ा (हाथीखेदा) गांव का रहनेवाला सुखराम अड़की थाना के सिंदरी गांव में रहकर झाड़-फूंक किया करता था।

इधर, मंगलवार को तमाड़ रेंज के वनपाल नवल पासवान पुलिस टीम के साथ जारापीड़ी गांव पहुंचे। घटना की जानकारी ली। शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया। वनपाल ने बताया कि सुखराम की प|ी पहले ही मर चुकी है। बेटी पार्वती नाबालिग है, इसलिए मुआवजे का भुगतान अभी नहीं किया जा रहा है।

हाथी सामने आया, तो धरे रह गए तंत्र-मंत्र

चारोंओर से पहाड़ियों से घिरे जारापीड़ी में मात्र आठ परिवार रहते हैं। वे जंगली हाथियों से हमेशा परेशान रहते हैं। इससे छुटकारे के लिए कहा जाता है कि उन्होंने सुखराम को गांव में बुलाया था। वह अपनी छह वर्षीय बेटी पार्वती कुमारी के साथ पिछले चार-पांच दिनों से गांव में ठहरा हुआ था। उसने अपने कथित तंत्र-मंत्र से गांव की सीमा को बांध दिया था, ताकि हाथियों का प्रवेश गांव में नहीं हो सके। सोमवार को जारापीड़ी के एतवा मुंडा सोमरा उर्फ नागा मुंडा के साथ सुखराम सारजमडीह बाजार गया था। तीनों ने जमकर शराब पी। इसके बाद बाजार में लोगों के बीच सुखराम जंगली हाथियों को पीट-पीटकर खदेड़ने की बड़ी-बड़ी डींगें हांकने लगा। शाम करीब छह बजे वे बाजार से जैसे ही जारापीड़ी गांव पहुंचे, घरबाड़ी के समीप अरहर के खेत में खड़े एक विशालकाय गजराज ने सुखराम को सूंढ में लपेट में ले लिया और पटककर मारा डाला।

रेलाडीह जंगल में फिर पहुंचा हाथियों का झंुड

बुंडू |13 जंगली हाथियों का एक झुंड रविवार को रेलाडीह जंगल पहुंचा गया। सोमवार रात को इन हाथियों ने डुगलीटांड़ के पास दर्जनों ग्रामीणों के खेतों में लगी धान की फसल को नष्ट कर दिया। हाथियों के दोबारा रेलाडीह जंगल में पहुंचने से आसपास के दर्जनों गांवों के लोग दहशत में हैं। और रतजगा करके अपनी फसल, खलिहान घर की रक्षा कर रहे हैं