हमारे कोहिनूर का मामला अब पाकिस्तान के कोर्ट में
ब्रिटिशमहारानी के ताज में लगा बेशकीमती कोहिनूर हीरा भारत का है या पाकिस्तान का। यह लाख टके का सवाल अब पाकिस्तान के लाहौर हाईकोर्ट में तय हो सकता है। कोर्ट ने सोमवार को संबंधित याचिका विचार के लिए मंजूर कर ली। इसमें सरकार को ब्रिटेन से कोहिनूर हीरा लाने के निर्देश देने की मांग है।
इससे पहले दिसंबर में लाहौर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ने याचिका ठुकरा दी थी। उस वक्त कहा था कि कोर्ट में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और ब्रिटिश हाई कमीशन के खिलाफ सुनवाई नहीं हो सकती। याचिकाकर्ता ने इस पर आपत्ति दर्ज करते हुए फिर याचिका दायर की। लेकिन सोमवार को चीफ जस्टिस खालिद महमूद खान ने रजिस्ट्रार की आपत्ति खारिज कर दी।
उन्होंने इस याचिका को सुनवाई के लिए उपयुक्त बेंच के सामने पेश करने का निर्देश दिया है। याचिका बैरिस्टर जावेद इकबाल जाफरी ने दायर की है। उन्होंने कहा, ‘कोहिनूर पर पाकिस्तान का दावा बनता है क्योंकि वह इसी इलाके का है, जो 1947 में बंटवारे के समय पाकिस्तान बन गया।’ लंदन से वकालत पढ़े जाफरी ने याचिका दायर करने से पहले 786 शब्दों का पत्र महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और पाकिस्तानी अफसरों को लिख चुके हैं।
जाफरी का दावा- चोरी लाहौर से हुई इसलिए हमारा
अफगानिस्तानके बादशाह ने लाहौर के बादशाह रंजीत सिंह को तोहफे में कोहिनूर दिया था। ब्रिटेन ने महाराजा रंजीतसिंह के पोते दलीप सिंह से छीन लिया और ब्रिटेन ले गए। एलिजाबेथ द्वितीय 1953 में जब महारानी बनीं तो उनके ताज में इसे जड़ा गया। दलीप सिंह को जब हटाया गया, तब वो हमारे पंजाब (लाहौर) के राजा थे। चूंकि इस हीरे की चोरी लाहौर से की गई, इसलिए इस पर भारत से ज्यादा पाकिस्तान का हक है।
...आशंकाभी जताई-तुरंत पाकिस्तान भेजें, वहां लूटमार मची है : मैंये नहीं कह रहा हूं कि हीरे को तुरंत पाकिस्तान भेज दिया जाए। यहां तो पहले से ही लूटमार मची हुई है। अगर हीरा यहां जाएगा तो उसकी जगह यहां नकली हीरा रख देंगे और असली हीरा लेकर वहां से भाग जाएंगे।’
हक हिंदुस्तान का
उधर,दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में इतिहासकार प्रोफेसर रिजवान कैसर पाकिस्तानी दावे को खारिज करते हैं। वे कहते हैं, ‘पाकिस्तान 1947 के बाद अस्तित्व में आया और उससे पहले जो भी था वो सब हिंदुस्तान का है। कोहिनूर का तारीखी रिश्ता हिंदुस्तान से है।’ हालांकि ब्रिटेन कोहिनूर पर भारत का दावा भी खारिज कर चुका है।
पहलेलाओ तो सही-कुलदीप नैयर
वरिष्ठपत्रकार कुलदीप नैयर लंबे समय से कोहिनूर भारत लाने की मुहिम चला रहे हैं। उन्होंने कहा है कि पहले कोहिनूर को वापस लाना जरूरी है। इस पर बाद में सहमति हो सकती है कि इसे भारत के पास रखा जाए या पाकिस्तान के पास।
कोहिनूर हीरे को मध्यकाल में आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले की कोल्लूर खदान से निकाला गया था। मूल रूप से यह काकतीय साम्राज्य के पास था। उसने इसे एक मंदिर में हिंदू देवी की आंख में लगवाया था। माना जाता है कि मूल हीरा 720 कैरेट का था जो कई हाथों में होता हुआ अब महज 105 कैरेट का रह गया है। ये हीरा 1848 के ब्रिटेन-सिख युद्ध के बाद ब्रिटेन के हाथ लगा था।