सीआरपीएफ ने लिया कमांडेंट का बदला
मनोज कुमार पिंटू/अजय प्रजापति.गिरिडीह/चंदौरी
प्रतिबंधितनक्सली संगठन भाकपा माओवादी की मांद में घुसकर गिरिडीह जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ के गिरिडीह सातवीं बटालियन के तिसरी के तिसरो के ईको सीआरपीएफ कंपनी ने जहां उन्हें धूल चटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वहीं झारखंड-बिहार के सीमावर्ती क्षेत्र गिरिडीह-जमुई का कुख्यात एरिया कमांडर दिनेश पंडित समेत तीन नक्सलियों को मौत के आगोश में सुलाकर सीआरपीएफ सातवीं बटालियन के शहीद कमांडेंट स्व हीरा कुमार झा की मौत का बदला भी बखूबी ले लिया।
कई वर्षों बाद पुलिस ने नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब देने के बाद उनका शव भी हासिल किया। नक्सलियों के पास तीन एसएलआर राइफल, दर्जनों राउंड गोली और एक डिजिटल स्टील कैमरा के साथ काफी संख्या में अन्य समान भी बरामद किया है। पुलिस और सीआरपीएफ को यह सफलता बीते शुक्रवार की शाम तिसरो पिकेट ईको कंपनी के सहायक कमांडेंट अजीत कुमार की अगुवाई में मिला। सामान्य सर्च ऑपरेशन की यह टीम पिकेट से जब महज पांच किमी दूर दलदलीया जंगल के समीप पहुंची तो जवानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग होनी शुरु हो गई। इस दौरान टीम में गिरिडीह एएसपी अभियान कुणाल कुमार भी मौजूद थे। वे कंपनी के सहायक कमांडेंट अजीत कुमार के साथ चल रहे थे। जबकि कंपनी के कुछ जवान आगे चल रहे थे। नक्सलियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। सहायक कमांडेंट और एएसपी अभियान को पहले ही सूचना मिल गई थी कि दस्ता दलदलीया जंगल के समीप किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में है।
रुक-रुक कर होती रही फायरिंग
नक्सलियोंके दस्ते में 65-70 की संख्या में नक्सली शामिल थे। जिसमें तीन महिला नक्सली के अलावा चार बच्चे भी दस्ता में मौजूद थे। घने जंगलों और पहाड़ों से घिरा दलदलीया का जंगल एरिया कमांडर मृतक दिनेश पंडित का खाक छाना हुआ था। इस कारण टीम को नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के दौरान कई समस्याएं भी नजर रही थी। पुलिस के अनुसार सर्च ऑपरेशन की टीम लगभग 11 बजे रात दलदलीया जंगल के समीप पहुंची। करीब पौने 12 बजे रात नक्क्सलियों ने जवानों और अधिकारियों पर फायरिंग करना शुरु किया। इस दौरान दोनों और से सारी रात फायरिंग की आवाज से जंगल गूंजता रहा। फायरिंग की आवाज बीच-बीच में बंद हो जाती थी। बताते हैं कि शुक्रवार रात दलदलीया जंगल में दोनों ओर से एक सौ से भी अधिक राउंड गोली चली। मुठभेड़ की इस घटना में एरिया