किसी बड़ी वारदात के फिराक में थे नक्सली!
साथही इस घटना के बाद कुछ सवाल भी उपजे हैं। अहम सवाल है कि क्या नक्सली इस इलाके में दुर्गापूजा के दौरान किसी बड़ी वारदात के फिराक में तो नहीं थे। नक्सलियों की योजना कहीं और कहर बरपाने की थी। पुलिस इन तमाम बिंदुओं की पड़ताल कर रही है। उग्रवादियों की चाहे जो भी मंशा रही हो परंतु गिरिडीह पुलिस ने उनके मंसूबे पर पानी जरूर फेर दिया। दरअसल यह इलाका घनघोर रूप से उग्रवाद प्रभावित है। ऊपर से यहां से बिहार राज्य की सरहद भी नजदीक है। इस क्षेत्र में भौगोलिक बनावट का उग्रवादी दोहरा लाभ उठाते रहे हैं। पहला तो घना जंगल और दूसरा चंद दूरी पर बिहार की सरहद, ऐसे में अक्सर वे पुलिस की आंखों में धूल झोंककर भागने में सफल रहे थे। पुलिस सूत्रों की मानें तो ऐसे में भौगोलिक बनावट को देखते हुए उग्रवादियों को उन्हीं की मांद में घेरना आसान नहीं था। परंतु इस बार पुलिस ने बड़ी ही चालाकी से काम किया और सही वक्त का इंतजार किया, तब जाकर यह सफलता हाथ लगी। बहरहाल पुलिस की इस सफलता की सराहना की करनी होगी।
रोहित भारती.तिसरी
गिरिडीहपुलिस और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन नक्सलियों की मौत गिरिडीह पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी बतायी जा रही है। मारे गये तीन नक्सलियों में से एक की शिनाख्त एरिया कमांडर (दिनेश पंडित) के रूप में हुई है।
पुलिस के हाथ हथियार भी लगे हैं। इस लिहाज से पुलिस इसे बड़ी सफलता मान रही है। सटीक सूचना के आधार पर ही सीआरपीएफ सात बटालियन और जिला पुलिस की टीम को यह संयुक्त सफलता हाथ लगी है। बताया जाता है कि इस इलाके में लगातार नक्सलियों की चहलकदमी हो रही थी। गिरिडीह एसपी क्रांति कुमार ने भी कहा हैं कि इस इलाके में नक्सलियों के मूवमेंट की खबर लगातार उन्हें प्राप्त हो रही थी।
नक्सलियों से बरामद हथियार।