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उरीमारी में ग्यारह दिवसीय महारुद्र यज्ञ प्रारंभ
यज्ञ का उद्घाटन करते महाप्रबंधक और एटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेंद्र कुमार।
कलश यात्रा में शामिल महिलाएं।
भास्कर न्यूज | उरीमारी
दामोदरनदी तट पर स्थित उरीमारी गौरीशंकर मंदिर प्रांगण में रविवार को श्री श्री 1008 ग्यारह दिवसीय महारुद्र यज्ञ का शुभारंभ हुआ। जो 18 फरवरी तक चलेगा। उद्घाटन सीसीएल बरका सयाल क्षेत्र के महाप्रबंधक प्रकाश चंदा और एटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व सांसद रमेंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से किया। उन्होंने कहा कि यज्ञ के आयोजन से लोगों में आध्यात्मिक भाव का संचार होता है, और आहूतियों के जलने से वातावरण शुद्ध होता है। मौके पर यज्ञ संचालक दिलीप यादव, बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक लोकनाथ महतो, हजारीबाग जिप उपाध्यक्ष संजीव बेदिया, गोपाल यादव, यूकोवयू के क्षेत्रीय सचिव विंध्याचल बेदिया, रामेश्वर सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
कलशयात्रा में शामिल हुई पांच हजार एक महिलाएं : वाराणसीसे आए यज्ञाचार्य पंडित डाॅ. अजय हरि शुक्ल के निर्देशन में कलश यात्रा के समय विधि विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसमें करीब पांच हजार एक महिलाएं शामिल हुईं। कलशयात्रा दामोदर नदी पहुंची। यहां भी पूजा अर्चना कर जल को संकल्पित किया गया और तब जल को कलश में भरा गया। इसके बाद फिर कलश यात्रा यज्ञ मंडप पहुंच कलश को मंडप में स्थापित की गई।
यज्ञमें ये हैं यजमान
श्रीश्री 1008 ग्यारह दिवसीय महारुद्र यज्ञ में उरीमारी पीओ जेएन प्रसाद गुप्ता, धीरेंद्र सिंह, धर्मदेव विश्वकर्मा, रामधन गोप गोविंद प्रसाद महतो यजमान बनकर अनुष्ठान में भाग लिया है।
इनकीहै सराहनीय भूमिका
यज्ञको सफल बनाने में यज्ञ समिति के श्यामसुन्दर प्रसाद, शिवशंकर सिंह, कृष्णा सिंह, कानू मांझी, महादेव बेसरा, दशाराम हेम्ब्रम, शनिचर मांझी, मनीष मांझी, दासो मांझी, चंदू जायसवाल, जतरू भगत, डाॅ. जीआर भगत, लालो महतो, सतीश चंद्र मिश्रा, चरका करमाली, बलिराम, लालो महतो, प्रभाकर सिंह, सीताराम किस्कू आदि महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सोलहवींबार है आयोजन
उरीमारीमें श्री श्री 1008 ग्यारह दिवसीय महारुद्र यज्ञ सोलहवीं बार आयोजित किया गया है। इसकी शुरुआत वर्ष 1999 में जरजरा पंचायत के पूर्व मुखिया स्व निर्मल कुमार यादव द्वारा की गई थी। निर्मल यादव ने अपने मृत्यु पर्यंत 2006 तक यज्ञ का सफल संचालन करते रहे। इसके बाद यज्ञ का बीड़ा उनके बड़े पुत्र दिलीप यादव ने उठाया और अब तक यज्ञ का आयोजन वे करते रहे हैं। इस बात की चहुंओर चर्चा होती है कि पुत्र हो तो ऐसा कि जो अपने पिता के धार्मिक कार्यों के उतरदायित्व को आज तक निभाते चले रहे हैं।