विस्थापित संघर्ष मोर्चा ने ठप कराया काम
> बरका-सयाल प्रबंधन से हुई वार्ता, नौ घंटे बाद शुरू हुआ काम
> कोयले का ऑफर नहीं दिए जाने से हो रही है रोजी-रोटी की समस्या : विश्राम सोरेन
भास्कर न्यूज. उरीमारी
उरीमारी-पोटंगा पंचायत के विस्थापित संघर्ष मोर्चा ने विरोध जताया। इस दौरान सीसीएल उरीमारी परियोजना की पोटंगा खुली खदान का उत्पादन और कोयले की ढुलाई शनिवार की सुबह छह बजे रोक दी। मोर्चा के लोग पोटंगा वर्कशाॅप के समक्ष पारंपरिक हथियार से लैस होकर एकत्रित हुए और नारेबाजी करने लगे। नेतृत्व कर रहे मोर्चा के अध्यक्ष विश्राम सोरेन ने कहा कि उरीमारी लोकल सेल के लिए कोयले का आॅफर नहीं दिए जाने से दस हजार मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।
मजदूर रोजी-रोटी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उनके समक्ष भूखे मरने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। दोपहर दो बजे सीसीएल बरका-सयाल महाप्रबंधक कार्यालय में वार्ता हुई। सेल संचालक दिलीप यादव ने कहा कि अगर अगले माह से लोकल सेल के लिए कोयले का आॅफर प्रतिमाह बीस हजार मीट्रिक टन नहीं देता है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जिसकी जवाबदेही प्रबंधन की होगी। वार्ता में महाप्रबंधक ईश्वरचंद्र मेहता ने कहा कि अगले माह से प्रतिमाह उरीमारी लोकल सेल के लिए बीस हजार मीट्रिक टन कोयले का आॅफर दिया जाएगा।
आश्वासन के बाद दोपहर तीन बजे से उत्पादन कोयले की ढुलाई शुरू कर दी गई। वार्ता में एसओपी वीएसपी सिन्हा, एरिया सेल्स आॅफिसर विनोद कुमार झा एरिया सुरक्षा पदाधिकारी मेजर मनीष राज उपस्थित थे। उत्पादन कोयले की ढुलाई ठप कराने वालों में महादेव बेसरा, कानू मांझी, चरका करमाली, सीताराम किस्कू, दशाराम हेम्ब्रम, कजरू उरांव, रमेश किस्कू, सुखदेव सोरेन, विश्वनाथ मांझी, बासदेव सोरेन, दासरासोमरा मांझी, मनाराम मांझी, महादेव मांझी, जतरू बेसरा, श्यामसुंदर करमाली, जुगल आदि मौजूद थे।
पांरपरिक हथियार से लैस होकर नारेबाजी करते विसंमो के लोग।