स्वतंत्रता सेनानी हरिनारायण बाजपेयी नहीं रहे
{विश्रामपुर के 19 स्वतंत्रता सेनानियों में आखिरी थे
{नगर परिषद् के शिवघाट पर हुआ अंतिम संस्कार
भास्करन्यूज | विश्रामपुर
स्वतंत्रतासंग्राम में फिरंगियों की दांत खट्टे करने वाले स्वतंत्रता सेनानी विश्रामपुर के युग पुरुष 102 वर्षीय हरिनारायण वाजपेयी ने सोमवार की रात करीब दो बजे अंतिम सांस ली। शतक वीर के निधन की खबर सुनते ही पूरे शहर में शोक की लहर फैल गई। विश्रामपुर के युग पुरुष के अंतिम दर्शन के लिए पुरुष- महिलाओं और नौजवानों की भीड़ उमड़ पड़ी। सभी की आंखों में एनके प्रति सम्मान के भाव दिख रहे थे। बिना कुछ बताए सभी के चेहरे के भाव यह बताने के लिए काफी था कि उन्होंने अपने समाज के एक महान योद्धा को खो दिया है। तिरंगे में शव को लपेटकर जैसे ही उनके आवास से शव यात्रा निकली, लोगों की आंखें भर आयी। उनका अंतिम संस्कार शिवघाट पर गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद किया गया।
मौके पर जिला प्रशासन की ओर से जिला समाज कल्याण पदाधिकारी मेघनाथ उरांव, विश्रामपुर थानेदार रामचंद्र महतो, मंत्री प्रतिनिधि रामचंद्र यादव, भाजपा के कुश ओझा, सुनील पांडेय ,नगर पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष अजय बख्श राय, समाजसेवी दयाशंकर दुबे, संजय पांडेय, राजद के नंददेव यादव, सुनील चौधरी समेत सैकड़ों लोग उपस्थित थे।
गांधी के कट्टर समर्थक थे बाजपेयी
विश्रामपुर| स्वतंत्रता सेनानी हरिनारायण वाजपेयी गांधी जी के कट्टर समर्थक थे। इनके अग्रज रामाकांत वाजपेयी भी आजादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका में थे। हजारीबाग में भारत छोड़ो आंदोलन की बैठक में वाजपेयी जी गांधी जी के निकट आए। इसके बाद खुद को आजादी की लड़ाई में झोंक दिया। विश्रामपुर के कांडा में वाजपेयी ने टेलीफोन का तार काटकर पुलिया ध्वस्त किया था, तब लोकनायक जयप्रकाश जी के साथ जेल गए। वाजपेयी आपने जीवन काल में दलगत राजनीति से काफी दूर रहे। वर्ष 1932 में वाजपेयी उत्तरप्रदेश के उन्नाव से विश्रामपुर आए थे। वाजपेयी जी के तीन पुत्र और चार पुत्रियां हैं। 26 जनवरी को अंतिम झंडोत्तोलन प्रखंड कार्यालय पर किया था।