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1.6 करोड़ हर माह शहर की सफाई पर खर्च, फिर भी नहीं बदल रही शहर की तस्वीर

7 वर्ष पहले
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(कोकर में डस्टबिन टूटने से ऐसे बाहर फेंका जा रहा है कचरा।)
रांची. दुर्गा पूजा, गांधी जयंती, ईद उल अजहा, दिवाली और फिर एक महीने बाद ही क्रिसमस। चरम पर है त्योहारों का उत्साह। साफ-सफाई, रंगाई-पुताई घर-घर में यह चल रहा है। कई तो इस मौके पर नए कंस्ट्रक्शन में भी जुटे हैं। लेकिन, इस उत्साह में एक कमी है। हम घर तो साफ कर रहे हैं, लेकिन अपने शहर की अनदेखी कर रहे हैं। घर से सफाई के दौरान निकल रहा कचरा सड़क पर फेंका जा रहा है। ऐसी-ऐसी जगहाें पर भी जहां, निगम के कर्मचारी पहुंचते ही नहीं हैं।
महत्वपूर्ण यह है कि यह सब तब हो रहा है, जब शहर में पूजा पंडाल सजे हुए है और अगले दो दिनों में राज्यभर से लोग इन्हें देखने रांची आएंगे। आखिर कब तक हम अपने शहर की छवि ऐसे बिगाड़ते रहेंगे और सरकार व प्रशासन पर दोष मढ़ते रहेंगे। हमारे शहर के प्रति हमारे खुद के भी तो कुछ दायित्व हैं। हमें खुद जिम्मेवारी लेनी होगी, तभी साफ-सुथरी राजधानी की छवि बनेगी।
समय आराधना व आस्था का है ही, उमंग व उत्साह का भी है। पर क्या गंदगी और कचरे के बीच अपने-अपने घरों को रोशन कर हमारी कोई उपासना परिपूर्ण होगी। आइए हम खुद साफ-सफाई की जिम्मेदारी लें और संकल्प लें कि कचरा वहीं फेंकेंगे, जहां से नगर निगम की गाड़ी इसे उठाकर ले जाती हो। यही संस्कार अपने बच्चों को भी दें। तभी चारो तरफ हरियाली के बीच बसी हमारी रांची होगी सुंदर और मनोरम।
क्या हैं प्रमुख समस्याएं: कचरे की रीसाइक्लिंग या समाप्त करने के लिए कोई प्लांट नहीं है। औद्योगिक और अस्पतालों के कचरे को समाप्त करने का सिस्टम भ्ी सिर्फ नाम के लिए है। नगर निगम सिर्फ प्रमुख इलाकों से कचरा उठाता है, बाकी स्थान पर यूं ही पड़ा रहता है।
निगम क्या करे
>हर मुहल्ले को छोटे इलाकों में बांटकर हर इलाकें में कचरे के डिब्बे लगें।
>अस्पताल नियम के अनुरूप गंदगी का निस्तारण करें।
>मांस-मछली की दुकानों व सब्जी मंडियों के क्षेत्र में कम से कम तीन बार कचरा उठाया जाए।
>कचरे के निस्तारण की सही व्यवस्था करें और उठाव सभी घरों से हो।
प्रशासन हो सख्त: खाने-पीने के सामान बेचने वालों और अन्य लोगों द्वारा कचरा सड़क पर फेंकने के खिलाफ कई बार नियम बनते हैं। जुर्माना भी तय होता है, लेकिन कभी इन्हें सख्ती से लागू नहीं किया जाता। इस ढिलाई के करण हिम्मत और बढ़ जाती है। प्रशासन सख्ती करे तो सब रुक जाएगा।
हम क्या करें: शुरुआत घर से ही करनी होगी। घर में एकत्रित कचरे को सामुदायिक कूड़ेदान में ही डालना होगा। गली-मुहल्लों या खुले कोनों में कचरा फेंकना बंद करना होगा। सड़क पर कुछ भी फेंक देने की आदत बदलनी होगी। दूसरों को भी ऐसा करने से रोकना
होगा। बच्चों को भी यह संस्कार देने होंगे।
कचरे का गणित
600 मीट्रिक टन कचरा प्रतिदिन निष्पादित करती है रांची की 12 लाख आबादी।
1000 टन तक पहुंच जाती है त्योहारी सीजन में प्रतिदिन कचरे की निकासी।
400 मीट्रिक टन का होता है उठाव, लेकिन 200 मीट्रिक टन हर दिन पड़ा रह जाता है।
आगे की स्लाइड्स में देखें शहर की गन्दगी की तस्वीर