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काली मंदिर पहुंची भक्तों की कलश यात्रा

5 वर्ष पहले
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भक्तों ने सुनी त्याग की कथा

गेतलातूस्थित देवी दर्शन में चल रहे वैष्णवी महोत्सव में रविवार को मंत्र जाप, मंडप पूजन और वैदिक कर्मकांड हुए। इसके बाद भागवत कथा हुई। पंडित नीरज कृष्ण शास्त्री ने प्रहलाद के चरित्र के बारे में बताते हुए कहा कि जीव अगर सच्चे हृदय से ईश्वर के शरण में जाए, तो वो जड़ से भी ईश्वर को प्राप्त कर सकता है। भगवान अपने भक्त का मान रखने के लिए हिरण्यकाश्यपु जैसे नास्तिक को भी आस्तिकता का परम स्वरूप दिखाते हैं।

बली के चरित्र का वर्णन करते हुए समर्पण, त्याग और दान की महिमा का बखान कथा वाचक ने किया। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की व्याख्या करते हुए आचार्य ने बताया कि नंद और यशोदा जैसे दूसरों को यश देने सुख की प्रेरणा देने वाले जीव के यहां भगवान स्वयं आनंद स्वरूप में प्रकट होकर समस्त जीवों को पवित्र करते हैं।

इस अवसर पर श्रीवामन अवतार और श्रीकृष्ण जन्म की मनोरम झांकी पेश की गई। श्रद्धालुओं ने नाच-गाकर भगवान का जन्मोत्सव मनाया। भागवत कथा में महेंद्र मिश्रा, वादक मनोज शास्त्री, जगदीश शर्मा, राजू शर्मा और चंदन शर्मा ने अपनी गीतों से संगत किया।

रांची | भूतहातालाब चैती दुर्गा पूजा समिति की ओर से रविवार को कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा मां दुर्गा की प्रतिमा के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को लेकर निकाली गई है। सुबह दस बजे करीब 750 महिलाएं माथे पर कलश लेकर मंदिर परिसर से निकली। संकट मोचन मंदिर पहुंचकर जल भरा गया। फिर मेन रोड होते हुए मंदिर परिसर पहुंची। यात्रा में ढाक-ढोल के साथ नगाड़ा था। कलश यात्रा में भक्त हाथों में 101 झंडा भी थामे थे। सभी श्रद्धालुओं ने देर तक मां के जयकारे लगाए। राजन वर्मा, उमेश कामदार और उदय शंकर ओझा ने शोभायात्रा की शुरुआत की।

कलश यात्रा में महिला श्रद्धालुओं ने गाए भक्ति के गीत।

भागवत कथा के दौरान भक्तों ने भगवान विष्णु के वामन अवतार के दृश्य का मंचन किया।

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