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कबीर की परंपरा के शायर थे निदा फाजली

5 वर्ष पहले
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निदाका अर्थ ही आवाज होता है, और निदा फाजली की आवाज यानी उनके शेर और गीत तादम दुनिया कायम रहेंगे। सच मायने में निदा कबीर की परंपरा के शायर थे। खेल निदेशक और कवि-लेखक रणेंद्र कुमार ने ये बातें याद-ए-निदा में बतौर मुख्य वक्ता कहीं। वे रविवार को मेन रोड स्थित रहमानिया मुसाफिरखाना में जलेस जसम ने द्वारा आयोजित गोष्ठी में बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ शायर हैरत फर्रुखाबादी ने निदा से जुड़े संस्मरण साझा किए। जबकि संचालक एमजेड खान ने किया। युवा शायर सुहैल सईद ने निदा को देश की साझी संस्कृति का नुमाइंदा शायर बताया। गोष्ठी में डॉ. जमशेद कमर, अनिल अंशुमन, कासिर अजीम, फजल करीम, नदीम खान, मो. नौशाद, मो. अमान, जाहिद, नौशाद अहमद खान आदि मौजूद थे।

गोष्ठी में अपने विचार रखतेे अनिल अंशुमन।

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