सोच से दुनिया बदलने के लिए लिखा निबंध, हुए पुरस्कृत
श्रीरामचंद्रमिशन द्वारा आयोजित अखिल भारतीय निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं को रविवार को गुरुनानक स्कूल सभागार में पुरस्कृत किया गया। पुरस्कार वितरण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विनोबा भावे विवि के पूर्व वीसी डॉ. एमपी सिन्हा थे। ज्ञात हो कि संयुक्त राष्ट्र सूचना केंद्र भारत भूटान के सहयोग से पिछले साल जून-जुलाई में देश की 11 विभिन्न भाषाओं में आयोजित इस प्रतियोगिता में लगभग 12 हजार शिक्षण संस्थानों के दो लाख विद्यार्थी शामिल हुए थे। इसमें स्कूली विद्यार्थी ग्रुप में कॉलेज के ग्रुप बी में थे। ग्रुप में निबंध का विषय था, मन एक बरतन नहीं है जिसे भरा जाना है, बल्कि एक ज्वाला है जिसे प्रज्ज्वलित करना है, जबकि ग्रुप बी का विषय जिसका आंतरिक जीवन नहीं है, वह परिस्थितियों का गुलाम है था।
प्रतियोगिता में झारखंड के 230 शिक्षण संस्थानों के लगभग चार हजार विद्यार्थी शामिल हुए थे। इनमें रांची के 97 शिक्षण संस्थानों के 1246 विद्यार्थी थे। 251 निबंधों को स्थानीय स्तर पर पांच को क्षेत्रीय स्तर पर चयनित कर पुरस्कृत किया गया। राज्य के लिए गर्व की बात रही कि पिट्स मॉडर्न स्कूल गोमिया के 11वीं की निशा कुमारी ने हिंदी निबंध लेखन में देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। रांची आसपास के शिक्षण संस्थानों में 37 स्कूल कॉलेज को कार्यक्रम में जुड़े रहने के लिए प्रशंसा पुरस्कार दिया गया। मौके पर मिशन के रांची प्रभारी अरुण कुमार लाल, क्षेत्रीय संयोजक राजकुमार सोमानी, प्रशिक्षक मुकेश तनेजा आदि मौजूद थे।
मुख्य अतिथि डॉ. एमपी सिन्हा ने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले छात्रों को बधाई दी। और आह्वान किया कि युवा राष्ट्र की शक्ति हैं, आप अपनी सकारात्मक सोच से दुनिया बदलें। इस प्रतियोगिता में शामिल होने वालों को देश की करोड़ों जनता से अलग बताते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपनी प्रतिभा पहचानने की जरूरत है और उसी से वह खुद को दुनिया की भीड़ से अलग साबित कर सकता है। डॉ. सिन्हा ने प्रतिभागियों के निबंध को समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में विचार बताया।
गुरुनानक स्कूल के सभागार में प्रशस्ति पत्र के साथ विभिन्न स्कूले के बच्चे।