येसु के दुखभोग को किया याद
10फरवरी को ऐश वेडनेसडे से चालीसा के महा उपवासकाल (लेंट) में प्रवेश किए मसीहियों ने 12 फरवरी को इस वर्ष के चालीसा के प्रथम शुक्रवार की विशेष आराधना की। खासकर कैथोलिक विश्वासियों ने अपने गिरजाघरों में क्रूस रास्ता की आराधना कर कलवरी पर्वत के राह पर येसु ख्रीस्त के क्रूस दुखभोग यात्रा और क्रूस मरण तक के दुखों को याद किया। रांची के पल्ली पुरोहित फादर अजय लकड़ा ने बताया कि चालीसा में क्रूस आराधना येसु की दुखभोग यात्रा का स्मरण है। इसमें शामिल हर मसीही आत्ममूल्यांकन के साथ अपने जीवन को परखने की कोशिश करता है। संत मेरिज कैथेड्रल परिसर में तीन चरणों (दोपहर 12 बजे, शाम चार 4.30 बजे ) में क्रूस रास्ता आराधना हुई। इसमें प्रथम प्रार्थना की अगुवाई सीमा ने की। चार बजे आराधना की अगुवाई राकेश ने की। आराधना के क्रम में सभी विश्वासी गिरजाघर में कतारबद्ध होकर प्रार्थना के साथ बढ़ते गए। और कलवरी पहाड़ पर ख्रीस्त की दुखभोग यात्रा को स्मरण कर उनके दुखों को अनुभव करने की कोशिश की। प्रार्थना के साथ चलते हुए विश्वासी 14 स्थानों पर रुक-रुक कर ख्रीस्त के दुखभोग, उपहास और कोड़ों की बौछार को अलग-अलग चरणों को याद किए, जैसा प्रभु ने मनुष्यों के उद्धार के लिए किया था।
संत मेरिज कैथेड्रल में तीन चरणों में हुई क्रूस रास्ता आराधना
संत मेरिज चर्च में क्रूस रास्ता की आराधना करते मसीही विश्वासी।
चालीसा बुराइयों का परित्याग कर अच्छाइयों को अपनाने का समय है। ये बातें लालपुर पेरिस के असिस्टेंट प्रीस्ट फादर अंतोनिस लकड़ा ने कहीं। उन्होंने कहा कि मसीहियों के लिए चालीसा का यह काल खुद में ख्रीस्तीय आदर्शों को तलाशने का है। यह भी सुनिश्चित करने का कि हमने प्रभु येसु मसीह की तरह क्या काम किया है।