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आंगनबाड़ी को मिलेंगे अंडे-फल

5 वर्ष पहले
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समाजकल्याण एवं बाल विकास मंत्री डॉ. लुईस मरांडी ने कहा कि अप्रैल से राज्य के तीन जिलों रांची, पू. सिंहभूम और दुमका के आंगनबाड़ी केंद्रों में सप्ताह में तीन दिन अंडे और फल दिए जाएंगे। प्रयोग सफल रहा, तो सभी जिलों में ऐसी ही व्यवस्था की जाएगी। वे शुक्रवार को जीटीसी हॉल में स्कूल पूर्व शिक्षा आंगनबाड़ी सेवाओं का सार्वभौमिकरण विषय पर आयोजित राज्यस्तरीय गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबाेधित कर रही थीं। आयोजन कैंपेन फॉर राइट टू एजुकेशन इन झारखंड (क्रेज) और चाइल्ड राइट एंड यू (क्राई) ने संयुक्त रूप से किया था।

डॉ. लुईस ने कहा कि आंगनबाड़ी सेवा में शत-प्रतिशत महिलाओं का जुड़ना गर्व की बात है। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों को दी जानेवाली सुविधाओं में और सुधार कर सशक्त बनाने की बात कही। कहा कि शिक्षा और आंगनबाड़ी के सशक्तीकरण में सरकार को क्रेज और क्राई जैसी संस्थाओं का सराहनीय सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सेविकाओं के प्रशिक्षण, आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय की व्यवस्था, आंगनबाड़ी भवन, बच्चों के यूनिफार्म, पोषण सखी की बहाली और मॉनिटरिंग के लिए सुपरवाइजरों को टैबलेट और सेविकाओं को मोबाइल साईकल दी जा रही है, इससे आंगनबाड़ी सेवाओं को प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम में 12 जिलों के लगभग 400 पंचायत प्रतिनिधि, आंगनबाड़ी सेविकाएं, सहायिकाएं और संस्थाकर्मी शामिल हुए। पैनल चर्चा में डॉ. सुदेशना, लीड्स के निरजा, प्रभा जायसवाल, सुशांतो चक्रवर्ती, समर्पण की इंद्रमणि साहू, मनोज दांगी, अनुश्री, बाल सखा के पीयूष, राहुल कुमार और दीनानाथ शामिल थे। संचालन कालेश्वर मंडल प्रवीण कुमार और धन्यवाद ज्ञापन मनोरमा एक्का ने किया।

क्रेज के डॉ. नीरज ने विषय प्रवेश कराते हुए क्रेज और क्राई द्वारा पिछले डेढ़ दशक से राज्य के 12 जिलों में चलाए जा रहे सेवा कार्य की जानकारी दी। क्रेज के अमन कुमार राज और रंजीत कुमार ने क्रेज की ओर से पिछले दिन 212 आंगनबाड़ी केंद्रो में किए गए अध्ययन की रिपोर्ट को रखा।

क्राई के इस्टर्न जोन मैनेजर महुआ चटर्जी ने आंगनबाड़ी केंद्र को बच्चों के सर्वांगीण विकास का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर हम सबों को व्यवस्था दुरुस्त करने के प्रति जवाबदेह होना होगा, तभी आज का बच्चा कल का हैप्पी एंड हेल्दी नागरिक बनेगा।

समाज कल्याण के निदेशक रवींद्र कुमार सिंह ने कहा कि आनेवाले तीन सालों में झारखंड के बच्चे कुपोषण मुक्त होंगे। तीन से छह आयु वर्ग के बच्चों को स्कूल पूर्व शिक्षा मिलना सुनिश्चित होगा। इसके लिए हमें हर समुदाय को जागरूक करना होगा। सभी को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।

जीटीसी हॉल में आंगनबाड़ी सेवाओं पर आयोजित राज्यस्तरीय संगोष्ठी में बोलतीं डॉ. लुईस मरांडी।

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