हेलिकॉप्टर से अब सीधे अस्पताल पहुंचेंगे मरीज
राजधानीमें राज्य के किसी भी कोने से अति गंभीर मरीजों को हेलिकाॅप्टर से सीधे अस्पताल पहुंचाकर तत्काल अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इससे खास तौर पर किसी दुर्घटना या फिर नक्सली घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति जवानों को तुरंत अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाई जा सकेगी। शहर के मेन रोड स्थित राज अस्पताल के नवनिर्मित भवन की छत पर हेलिकॉप्टर से लाए जाने वाले मरीजों के लिए 32 मीटर की ऊंचाई पर रूफ टॉप हेलिपैड बनकर तैयार है। रूफ टॉप हेलिपैड की सुविधा वाला यह झारखंड और बिहार का पहला अस्पताल होगा। प्रबंधन ने सारी तैयारियां पूरी कर है। जल्द ही अस्पताल की छत पर हेलिकॉप्टर उतारने की टेस्टिंग होगी। इसके बाद इस सुविधा को शुरू करने के लिए संबंधित प्राधिकार से अनुमति ली जाएगी।
नगरनिगम से पास हुआ है रूप टॉप हेलिपैड का नक्शा
राजअस्पताल में रूफ टॉप हेलिपैड का नक्शा रांची नगर निगम ने पहले ही पास किया था। जो अब जाकर वह बनकर तैयार हुआ है। इस तरह की फैसिलिटी पड़ोसी राज्यों में सिर्फ कोलकाता के एक अस्पताल में है। अस्पताल का नया भवन बन गया है। लेकिन हेलिपैड के मामले में अभी राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकार से अनुमति ली जानी बाकी है।
मरीजों को जल्द आवश्यक चिकित्सा देने के लिए हेलिपैड बनाया गया है। जल्द ही लैंडिंग टेस्टिंग के लिए अनुमति लेंगे। राज अस्पताल को अत्याधुनिक बनाया गया है। ओटी और क्रिटिकल केयर यूनिट को बेहतर संसाधनों से युक्त किया गया है। -योगेशगंभीर, प्रबंधक
हेलिपैड बनने के बाद अस्पताल में इसके लिए एक स्पेशल लिफ्ट भी लगाई गई है। लिफ्ट के साइड में मशीन लगी है। जबकि सामान्य लिफ्ट में ऊपर में मशीन लगी रहती है। इससे छत ऊंची हो जाती है। अस्पताल के हेलिपैड के साथ बगल में फायर वाटर का भी इंतजाम है। ऊपर में ही इसके लिए टैंक बना है। हेलिपैड में कोई खामी रहे, इसके लिए निर्माण के क्रम में रांची एयरपोर्ट से भी विशेषज्ञों को बुलाकर लगातार सलाह ली गई।
अस्पताल के रूफ टॉप हेलिपैड का उपयोग शुरू होने से मरीज की जान बचाने के लिए गोल्डन ऑवर का खास तौर पर उपयोग हो सकेगा। उदाहरण के तौर पर अगर नक्सली घटना में घायल किसी जवान को हेलिकॉप्टर से लाया जा रहा है, तो उसे राजधानी के किसी बड़े अस्पताल तक पहुंचाने में जितना समय लगेगा, उससे आधे समय में ही इस अस्पताल में पहुंचाया जा सकेगा। राज्य के किसी भी इलाके से रांची एयरपोर्ट तक हेलिकाप्टर पहुंचने के बाद वहां से एबुलेंस में चढ़ाने और अस्पताल में पहुंचाने में एक घंटा लग जाता है। अगर अस्पताल की छत पर हेलिकाप्टर उतरेगा तो मरीज को पांच मिनट के भीतर ही जरूरी चिकित्सा मिल सकेगी। अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अनिल कुमार शुक्ला का दावा है कि उनके यहां वर्ल्ड क्लास मानक वाला ऑपरेशन थियेटर है।
अस्पताल की छत पर ऐसा बना है रूफ टॉप हेलिपैड।
{राज अस्पताल में रूफ टॉप हेलिपैड तैयार
{गोल्डन आवर का उपयोग हो सकेगा मरीज की जान बचाने में