अफसरों के विरुद्ध बिना अभियोजन स्वीकृति के मुकदमा गलत : हाईकोर्ट
पुलिसअधिकारियों और पब्लिक सर्वेंट के विरुद्ध सरकार द्वारा अभियोजन की अनुमति के बिना मुकदमा चलाना अनुचित है। इस संबंध में सीआरपीसी की धारा 197 में प्रावधान किया गया है। इसी आधार पर झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को दो एएसआई के विरुद्ध दर्ज मुकदमे में अधिकारियों के पक्ष में फैसला दिया। जस्टिस प्रशांत कुमार की अदालत ने चाईबासा के तत्कालीन एएसआई प्रेममोहन प्रसाद और सिमडेगा के एएसआई रवींद्र कुमार को राहत दी। उल्लेखनीय है कि सिमडेगा के एएसआई ने एनएच 75 पर लगे जाम को हटाने की कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई के बाद कुछ लोगों ने एएसआई के विरुद्ध मुकदमा कर दिया। इसी प्रकार चाईबासा के एएसआई ने एक अपराध के एक आरोपी को गिरफ्तार किया था तो आरोपियों की ओर से उनके विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई गई। इन मामलों में सरकार की अभियोजन की स्वीकृति के बिना ही मुकदमे की सुनवाई होने लगी। निचली अदालत की कार्रवाई को अधिकारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी जिसकी सुनवाई के बाद कोर्ट ने अफसरों के पक्ष में फैसला दिया।
रांची | पूर्वविधायक उमाशंकर अकेला की अग्रिम जमानत याचिका मंगलवार को खारिज कर दी गई। यह आदेश सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अखिल कुमार की अदालत ने मंगलवार को पारित की है। उमाशंकर को राज्यसभा चुनाव 2010 से जुड़े नोट फॉर वोट मामले में नामजद आरोपी बनाया गया है।
रांची | मनीलाउंड्रिंग मामले में जेल में बंद पूर्व स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप शाही की जमानत याचिका पर मंगलवार को आंशिक सुनवाई हुई। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अखिल कुमार की अदालत ने सीबीआई का पक्ष सुनने के लिए 15 फरवरी की तिथि निर्धारित की है। भानु ने सत्र में भाग लेने की अनुमति मांगी है।
रांची | पटनाहाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस केएस परिपूर्णम, जस्टिस एसबी सान्याल और झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता चंद्रशेखर के निधन पर मंगलवार को हाईकोर्ट में फुलकोर्ट रिफरेंस किया गया। रिफरेंस में चीफ जस्टिस समेत सभी जज और अधिवक्ताओं ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए मौन रखा। रिफरेंस के बाद कोर्ट की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।