निदा पर आज भी फिदा है रांची
मेनरोड स्थित तस्लीम महल राजधानी की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। इसमें सोशल एक्टीविस्ट डॉ. असलम परवेज की भूमिका अहम है। उनकी ही कोशिशों से निदा फाजली जैसे मशहूर शायर ने रांची में पहली बार 2007 में कदम रखे थे। वही उनका आखिरी रांची दौरा भी साबित हुआ। डॉ. परवेज ने बताया कि उनके जैसा बेबाक शायर रांची में सिर्फ सिद्दीक मुजीबी हुए। जो संयोग से निदा के बहुत अच्छे दोस्त थे। उनके कहने पर ही वह मुंबई से रांची मुशायरा पढ़ने आए थे। डॉ. परवेज ने निदा के तत्कालीन राज्यपाल सिब्ते रजी से मिलने का रोचक प्रसंग सुनाया। तब क्रिकेट स्टार महेंद्र सिंह धोनी भी राजभवन में मौजूद थे। डॉ. सरवर साजिद ने उनसे जुड़ी यादों को साझा करते हुए कहा कि वह ठेठ हिंदुस्तानी गंगा-जमुनी तहजीब के शायर थे, जो कहता था कि उसने सूरदास को पढ़कर शायरी शुरू की। बताया कि तब मुशायरे में इंदरसिंह नामधारी भी शामिल हुए थे।