निवेश नीति में शामिल किए जाएंगे उद्योगपतियों के सुझाव
राज्यसरकार ने आश्वस्त किया है कि प्रस्तावित झारखंड इंडस्ट्रीयल एंड इंवेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी 2016 में पूंजीपतियों और निवेशकों के सुझाव शामिल होंगे। अपर मुख्य सचिव उद्योग एवं खान यूपी सिंह ने भरोसा दिलाया कि विभाग ने पॉलिसी के ड्राफ्ट में अपनी ओर से पूरा प्रयास किया गया है कि निवेशकों को कोई कठिनाई नहीं हो। सरकार से उन्हें जो भी सुविधा या सहायता मिलनी है, उसकी रूपरेखा स्पष्ट हो। नई पॉलिसी में सरल प्रक्रिया हो, इसका ध्यान रखा जाएगा। इसी उद्देश्य से प्रस्तावित झारखंड इंडस्ट्रियल एंड इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी पर सुझाव के लिए यह बैठक बुलाई गई है।
वे ड्राफ्ट पॉलिसी पर सुझाव के लिए राज्य के विभिन्न औद्योगिक संघों के पदाधिकारियों के मंगलवार को होटल बीएनआर में हुई बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इसमें आए सुझावों को एकतत्रित कर अगले एक-दो महीने के भीतर पॉलिसी को कैबिनेट की स्वीकृति लेते हुए अधिसूचित कर दिया जाएगा।
क्वालिटी सर्टिफिकेशन के लिए मिलने वाली पांच लाख की राशि को बढ़ा कर 15 लाख रुपये किया जाए। आयरन ओर के डस्ट को परिष्कृत करने के लिए नयी तकनीक की स्थापना में भी सरकारी सहायता मिले। क्योंकि डस्ट बेकार पड़ा रहता है और वह सड़कों पर बिछाने के काम में उपयोग होने लगा है। आदित्यपुर इंडस्ट्रीयल एरिया में जमीन नहीं है। आयडा का विस्तारीकरण होना चाहिए। फैक्ट्री लाइसेंस शुल्क छह गुणा कर दिया गया है जो अव्यवहारिक है।
उद्योगपतियों निवेशकों के जिन सुझावों को पॉलिसी में शामिल करने पर सहमति बनी उसमें कैपिटल सब्सिडी में एकरूपता लाने पर सहमति बनी। पहले सात से 20 फीसदी तक सब्सिडी मिलती थी। अब उसे 20 फीसदी कर दिया जायेगा। एक निश्चित अवधि तक वैट से छूट की मांग को यहां स्वीकार किया गया। पहले वैट का रिवर्समेंट होता था। लेकिन निवेशकों का कहना था कि इसमें काफी कठिनाइयां होती है। मेगा इंडस्ट्रीज की स्थापना पर भी इंसेंटिव दिया जाएगा। पॉलिसी के ड्राफ्ट में इसकी व्यवस्था नहीं थी।
बैठक में झारखंड इंडस्ट्रियल एंड इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी की जानकारी देते अधिकारी।