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रिम्स में 60 बेड पर 200 मरीजों का इलाज

5 वर्ष पहले
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रिम्सअव्यवस्था का शिकार है। अस्पताल के महत्वपूर्ण व्यस्ततम वार्डों में से एक है न्यूरो वार्ड। यहां हर साल हजारों मरीज आकर इलाज कराते हैं। इसके बाद भी रिम्स प्रबंधन का इस वार्ड की ओर बिल्कुल ध्यान नहीं। वार्ड में महज 60 बेड की जगह है। लेकिन मरीजों की अधिकता की वजह से सेलेनियम में कुछ बेड डालकर किसी तरह 75 बेड की व्यवस्था की गई है। जबकि स्थिति ऐसी है कि यहां कभी भी 200 से कम मरीज नहीं रहते।

मरीजों की भीड़ को देखते हुए कई सालों से वार्ड में बेड बढ़ाने की मांग हो रही है। लेकिन प्रबंधन लगातार इसकी उपेक्षा कर रहा है। दूसरी तरफ सरकार कभी रिम्स में, तो कभी सदर में इस वार्ड को शिफ्ट करने का सब्जबाग दिखाती है। डेढ़ साल से न्यूरो विभाग को सदर हॉस्पिटल के नए सुपर स्पेशिएलिटी विंग में शिफ्ट करने की बात हो रही थी। जो टांय-टांय फिस्स साबित हुआ।

रिम्स के न्यूरो वार्ड में जमीन पर बेड लगाकर इस तरह होता है मरीजों का इलाज।

न्यूरो वार्ड के लिए जगह चाहिए। पहले सदर हॉस्पिटल के नए सुपर स्पेशिएलिटी विंग में इसे ट्रांसफर करने की बात थी। पर वहां कुछ हो नहीं सका। न्यूरो वार्ड को लेकर अभी कोई नया प्लान नहीं बना है। -डॉ.बीएल शेरवाल, निदेशक रिम्स

वार्ड में आए मरीजों का इलाज जमीन पर बेड लगाकर किया जा रहा है। इसकी वजह से वार्ड के अंदर दो बेडों के बीच, साइड का एरिया, गलियारा और बाहरी बरामदा हर तरफ मरीजों की लाइन लगी रहती है। डॉक्टरों और नर्स को जमीन पर झुककर मरीजों का इलाज करना पड़ता है। वहीं, मरीजों को भी काफी परेशानी होती है। सबसे ज्यादा दिक्कतें ठंड के मौसम में होती हैं। वहीं बरसात में जमीन पर लगे बेड सीलन या फिर बारिश की बौछार में भीग जाते हैं। हर तरफ मरीज रहने के कारण ठीक से सफाई भी नहीं हो पाती।

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