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नहीं मिली रैक, एर्नाकुलम एक्सप्रेस पर ग्रहण

5 वर्ष पहले
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मुख्यमंत्रीरघुवर दास की मांग पर रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में रांची से दक्षिण भारत के लिए एक नई ट्रेन देने का आश्वासन दिया था। रेलमंत्री मंत्री के घोषणा के करीब डेढ़ माह बाद मंत्रालय ने पिछले साथ 15 जुलाई को रेलवे बोर्ड की बैठक में रांची के लिए नई ट्रेन हटिया- एर्नाकुलम एक्सप्रेस को मंजूरी दे दी। एक दिसंबर 2015 को बोर्ड ने इस नई ट्रेन की समय-सारिणी भी जारी कर दी। यहां तक कि दिसंबर के अंतिम सप्ताह में ट्रेन के शुरू होने की चर्चा भी होने लगी। लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी ट्रेन के परिचालन की बात आगे नहीं बढ़ी। दरअसल रेलवे को इस नई ट्रेन के लिए बोगी ही नहीं मिल रही है। वहीं, दक्षिण पूर्व रेलवे के जीएम एके गोयल भी अब पल्ला झाड़ रहे हैं।

बकौल जीएम रेलवे बोर्ड को रिमाइंड करा दिया गया है, लेकिन ट्रेन कब चलेगी यह कहना मुश्किल है। जब तक बोगी उपलब्ध नहीं होगी कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। ऐसे में नई ट्रेन के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

इधर, जेडयू-आरसीसी के सदस्यों में रेलवे के खिलाफ आक्रोश है। जेडयू-आरसीसी के सदस्य अशोक नागपाल और मुकेश कुमार ने कहा कि रेलवे के पास जब बोगी नहीं थी, तो क्यों जल्दबाजी में समय-सारिणी की घोषणा कर दी गई। अब जीएम बोगी नहीं मिलने की बात कह पल्ला झाड़ रहे हैं। जीएम को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ट्रेन का परिचालन जल्द शुरू नहीं हुआ, तो रांची की जनता सड़क पर उतरेगी।

नई ट्रेन के लिए बोगी उपलब्ध नहीं है। लोगों के काफी फोन रहे हैं। रेलवे बोर्ड को हटिया-एर्नाकुलम ट्रेन चलाने के लिए रिमाइंड करा दिया गया है। जब तक कुछ लिखित आदेश बोर्ड से नहीं जाता, तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता है। -एकेगोयल, जीएम, द-पू रेलवे

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रेलमंत्री से मिलकर हटिया से वेल्लोर के लिए नई ट्रेने देने का आग्रह किया था। कहा था कि झारखंड से बडी संख्या में लोग इलाज के लिए वेल्लोर जाते हैं। उनकी सुविधा के रांची से एक ट्रेन जरूरी है। पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह ट्रेन झारखंड के लिए महत्वपूर्ण है।

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