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आयुष ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी निर्माण में 10 लाख के सस्पेंस पर अफसरों में छिड़ी जंग

5 वर्ष पहले
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पैसों के लिए संबंधित अफसरों के बीच ख्ूब हो रही है लेटरबाजी।

पवन कुमार }9471513998

राजधानी के डोरंडा में तीन साल पहले बनी आयुष ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी के निर्माण में खर्च हुई राशि को लेकर अफसरों में भारी विवाद हो रहा है। भवन निर्माण करने वाली सरकारी एजेंसी एनआरईपी-1 ने 1.32 करोड़ रुपए खर्च होने के बात कही हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत आयुष निदेशालय का कहना है कि भवन निर्माण पर 1.22 करोड़ रुपए ही खर्च हुए हैं। ऐसे में 10 लाख रुपए वापस किए जाने चाहिए। यही नहीं, भवन के हैंडओवर को लेकर भी अधिकारियों के बीच मतभेद उभरा है। एनआरईपी की तरफ से भवन को हैंडओवर करने के साथ उद्घाटित बताया जा रहा है, लेकिन आयुष निदेशालय का कहना है कि भवन हैंडओवर नहीं हुअा है। एनआरईपी यहां शेष बचे कार्यों को पूरा कर लेबोरेटरी को हैंडओवर करे। हालांकि यहां अभी डायल 104 सेवा ही चल रही है। इसके अलावा निदेशालय के अधिकारी बैठ रहे हैं।

तीनसाल में भवन की दुर्गति

अबभवन 1.32 करोड़ में बना या 1.22 करोड़ में? ये तो आने वाले समय में पता चल ही जाएगा। लेकिन भवन में घटिया निर्माण होने की साक्ष्य उभरने लगे हैं। केवल तीन साल में ही भवन की दीवारों से पानी रिसने लगा है। कई स्थानों पर क्रेक हो गए। दीवारों का प्लास्टर भी उखड़ रहा है। जबकि अभी तक भवन का हैंडओवर भी नहीं हुआ है।

मीटर के पास सीढ़ियों के नीचे पानी रिसता हुआ।

दीवारों पर चढ़ाया गया प्लास्टर भी उखड़ने लगा है।

डाेरंडा में बनाया गया यह लेबोरेटरी का भवन। विवाद के चलते यह बिना काम के बर्बाद होता जा रहा है।

तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री की ओर से हुआ है उद‌्घाटन

एनआरईपीके कार्यपालक अभियंता का कहना है कि योजना के संबंधित कनीय अभियंता की ओर से बताया गया है कि निर्मित भवन का उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री की ओर से किया गया। इसमें दो-तीन साल से डाॅयल 104 का संचालन किया जा रहा है।

भवन, आयुष को हैंडओवर ही नहीं तो उद‌‌्घाटन कैसे हुआ?

जिलाआयुष चिकित्सा पदाधिकारी ने लिखा है कि एनआरईपी-1 की ओर से बताया जा रहा है कि तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री की ओर से भवन का उद्घाटन किया गया, जो सत्य से परे हैं। जब एनआरईपी की ओर से भवन का हस्तांतरण ही नहीं किया गया है तो मंत्री की ओर से उद्घाटन का प्रश्न ही नहीं उठता है। मंत्री ने केवल डॉयल 104 का उद‌्घाटन किया है।

हमारी ओर से पूरे पैसे का विपत्र सौंपा गया है

लेबोरेटरीभवन का निर्माण मेरे समय में नहीं हुआ। जहां तक बचे गए 10 लाख रुपए का सवाल है तो इस संबंध में हमारी ओर से विपत्र सौंपा गया है। जब विपत्र दिया गया, तब ही पैसे की निकासी हुई होगी। बिना विपत्र का ट्रेजरी से पैसा निकलता ही नहीं है। दीपककुमार, ईई, एनआरईपी-1

10 लाख रुपए का हिसाब नहीं दे रहे हैं

10लाख रुपए एनआरईपी के पास शेष बचे हैं, जिसका हिसाब नहीं दिया जा रहा है। इस संबंध में एनआरईपी के ईई को पत्र लिखा गया है। जवाब आने के बाद अागे की कार्रवाई की जाएगी। डॉ.रवींद्र राय, जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी, रांची

एनआरईपी-1 के ईई दीपक कुमार की अोर आयुष को हाल ही में भेजे गए पत्र में कहा गया है कि भवन निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति 1.50 करोड़ की थी। संबंधित योजना के मापी विपत्र के आधार पर 1.32 करोड़ रुपए एनआरईपी-1 को प्राप्त हुए। ये पैसे कराए गए कार्यों में खर्च हुए। जहां तक लेबोरेटरी भवन में जेनरेटर शेड, चहारदीवारी एवं गेट का निर्माण होने की बात कही जा रही है तो योजना के तहत शेष 17,55,392 लाख रुपए एनआरईपी को नहीं दिए जाने के कारण ये काम नहीं हो सके हैं। गौर करने वाली बात यह है कि एनआरईपी की ओर से 18 जून 2013 को सौंपे गए पत्र में 1.22 करोड़ रुपए खर्च की सूचना किस हिसाब से दी गई थी।

जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रविंद्र राय ने एनआरईपी-1 के कार्यपालक अभियंता को लिखे पत्र में कहा है कि ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी के निर्माण पर 1.32 करोड़ का खर्च बताया जा रहा है। जबकि एनआरईपी की ओर से 18 जून 2013 को सौंपे पत्र में 1.22 करोड़ रुपए खर्च की ही सूचना दी गई है। इस हिसाब से 10,44,608 रुपए एनआरईपी-1 के पास शेष बचे है। 18 जून 2013 के बाद भवन में कोई काम भी नहीं किया गया। ऐसे में 10,44,608 रु. कहां और कब खर्च हुए? यह एनआरईपी स्पष्ट नहीं कर रहा है। बचे हुए पैसे से अधूरे कार्य किए जाएं, अन्यथा विभाग को वापस किया जाए। ऐसा होने पर प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की जाएगी।

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