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सरना आदिवासियों ने सिरासिता नाले में की सामूहिक प्रार्थना

5 वर्ष पहले
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गुमलाके सिरासिता नाले के ककड़ो लाता में सरना आदिवासियों ने आना आदि प्रार्थना सभा की। कार्यक्रम में झारखंड, ओड़िसा, बंगाल, बिहार, नेपाल और छत्तीसगढ़ के सरना अगुवाओं के नेतृत्व में सरना आदिवासियों ने हिस्सा लिया। सभी ने चाला एड़पा और पहाड़ की चोटी पर ढ़कनी चुमा के दर्शन के लिए प्रस्थान किए। यहां सरना प्रार्थना सभा चचगुरा ने नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था की थी। अंतिम विनती सिरासिता नाले में किया गया।

कार्यक्रम में घोषणा की गई कि एक वर्ष के अंदर सरना आश्रम स्कूल खोला जाएगा, जो अंग्रेजी हिंदी दोनों माध्यमों का होगा। 19 मार्च को रांची में सरना धर्मकोड को लेकर महारैली की जाएगी। इसके माध्यम से सीएनटी-एसपीटी संशोधन का विरोध किया जाएगा। कार्यक्रम में आदिवासी सरना महासभा के संयोजक पूर्व मंत्री देवकुमार धान, केंद्रीय अध्यक्ष नारायण उरांव, केंद्रीय महासचिव चारे उरांव, बुधवा उरांव, अमित उरांव, बिरसा उरांव, पूना उरांव सहित कई ने अहम भूमिक निभाई।

धर्मगुरुहुए सम्मानित

कार्यक्रममें राष्ट्रीय धर्मगुरु जयपाल उरांव, सहायक धर्मगुरु जलेश्वर उरांव, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नीरज मुंडा, राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र भगत, प्रो. प्रवीण उरांव, बहन पावर्ती उरांव, सोमे मुंडा, बालकिशुन उरांव और राजेंद्र उरांव काे शपथ ग्रहण कराकर उन्हें पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर धर्मगुरुओं ने युवाओं से आदिवासी संस्कृति को बचाए रखने की अपील की। कहा कि युवा आधुनिक सोच रखें, लेकिन अपनी संस्कृति को छोड़ें। सभी को अपनी संस्कृति पर नाज होता है।

कार्यक्रम सरना धर्मगुरु जयपाल उरांव जलेश्वर उरांव को सम्मानित करते लोग।

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