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रिम्स डॉक्टरों ने 12 साल के बच्चे के पैर की नस का किया सफल इंप्लांट

4 वर्ष पहले
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रिम्समें गुरुवार देर रात सर्जनों ने 12 साल के मासूम उपेंद्र कुमार को नई जिंदगी दी। वह बिहार के गया जिले के डोभी थाना क्षेत्र के खराठी गांव का रहनेवाला है। रात में उसे गंभीर हालत में इमरजेंसी में भरती कराया गया। उसकी बाईं पैर के घुटना के पीछे का हिस्सा बुरी तरह से चोटिल था और लगातार रक्तस्राव हो रहा था।

आपात स्थिति में सीओटी में कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. अंशुल कुमार, ऑर्थो डिपार्टमेंट के डॉ. सुधांशु, डॉ विनय प्रताप यूनिट के डॉ हिमांशी समेत अन्य जूनियर डॉक्टरों के सहयोग से उपेंद्र के चोटिल पैर की सर्जरी की गई, जो सफल रही। डॉ अंशुल ने बताया कि फिलहाल, मरीज की हालत में सुधार है और ऑपरेशन के बाद उसका पैर वार्म (गर्म) है। यानी पैर में खून का संचरण हो रहा है। करीब सात सेमी नर्व कटा था, जिसे पैर के दूसरे हिस्से से निकाल कर वहां इंप्लांट किया गया है।

डॉ. अंशुल ने बताया कि उपेंद्र ट्रक पर खलासी का काम करता है। गुरुवार रात रांची-रामगढ़ रोड पर एक्सीडेंट में घायल हो गया था। परिजनों ने बताया कि ट्रक का चक्का उसकी बाईं पैर पर चढ़ गया था। इस कारण फिमोरल नर्व की ब्रांच नर्व कट गई थी। इससे अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। उसका ब्लड प्रेशर 60 हो गया था। डॉ. एलबी मांझी यूनिट के जूनियर डॉक्टरों ने सारी व्यवस्था की। दो यूनिट खून का इंतजाम भी किया। उस वक्त डॉ विनय प्रताप यूनिट के जूनियर डॉक्टर अन्य मरीजों का ऑपरेशन करने की तैयारी में थे। उन्होंने इस बच्चे के लिए ओटी टेबल खाली कर दिया। वेस्कुलर एनास्टमोसिस(ऑपरेशन का नाम) तकनीक से सर्जरी की गई और सबके सहयोग से बच्चे की जान बचाई गई।

कार्डियोथोरेसिक सर्जन ने रात 12.30 बजे शुरू किया ऑपरेशन, मरीज की हालत में सुधार

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