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मानसून ने दिया धोखा, रांची के आसपास इलाकों में 2 से 30%तक ही हुई रोपनी

4 वर्ष पहले
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भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट

कमबारिश की वजह से रांची के आसपास ग्रामीण इलाकों में किसानों की हालत खराब है। खेत में बिचड़ा तैयार है पर किसान पानी के लिए टकटकी लगाए बैठे हैं। जुलाई बीतने को हैं, लेकिन रांची के आसपास के इलाकों में धानरोपनी 2 से 14 फीसदी तक ही हो पाई है। जबकि पिछले साल इस समय तक करीब 40 फीसदी रोपनी हुई थी। एक नंबर खेत जिसे गड़हा दोइन कहते हैं उसमें 60% तक रोपनी हो गई है। दो नंबर चौरा में 10 से 12 प्रतिशत ही रोपा हो पाया है। तीन नंबर चोरा में अभी तक शुरुआत भी नहीं हुई है।

धानरोपनी का सही समय दो से 15 जुलाई तक

धानरोपनी का समय दो जुलाई से 15 जुलाई तक को सही माना गया है। इसलिए इस दौरान ही किसान उन्नत किस्म के धान बीज रोपते हैं। इस अवधि में रोपनी कर लेने से उपज अधिक होती है। देर से रोपनी करने पर अच्छा बीज भी सही फसल नहीं देता। समय बीतने के बाद धान की रोपाई करने पर जैसे ही ठंड बढ़ती है तो गोबरइला नामक कीटाणु धान पर लग जाते हैं और चावल बनने में बाधा पहुंचाते हैं। इनपर कीटनाशक भी कारगर नहीं होते। इसलिए पैदावार कम मिलता है।

इधर, रातू प्रखंड सूखे की ओर बढ़ रहा है। बिचड़ा तैयार है और किसान आसमान की ओर सर उठाए उमड़ते बादलों को तो रोज देखते हैं, लेकिन बादल है कि बरसते ही नहीं। किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट दिखने लगी है।

ओरमांझी में धान की रोपाई करतीं महिलाएं।

कारण : पिछलेसाल से 37 मिमी ज्यादा बारिश

{खेत मेंबिचड़ा सूखने की स्थिति में हैं। अबतक 12 फीसदी ही रोपनी हुई है, जो पिछले वर्ष से नौ प्रतिशत कम है। किसान सुरेश पाहन ने कहा कि बोरिंग से रोपनी नहीं करेंगे तो समय बीत जाएगा।

{बीटीएम अंजीवश्रीवास्तव ने कहा कि बिचड़ा तैयार है। अधिकांश किसानों ने श्रीविधि या लाइनिंग से रोपनी की है। शुक्रवार तक प्रखंड में 57 मिमी बारिश हुई है। जबकि पिछले वर्ष मात्र 20 मिमी ही बारिश हुई थी।

खूंटी : 12 फीसदी रोपनी

कारण: कमबारिश

{पिछलेसाल से 14 फीसदी कम रोपनी हुई है। जिले में 76 हजार हेक्टेयर में धनरोपनी का लक्ष्य रखा गया है। अबतक 9374 हेक्टेयर में रोपनी हुई है।

पिपरवार : 15-26 फीसदी

कारण: 30फीसदी बारिश

{धानऔर मकई दोनों की रोपनी प्रभावित हो रही है। राय पंचायत में 26, बमने और सारले में 15 फीसदी रोपनी हुई है। अन्य पंचायतों में शुरू भी नहीं हुई है।

बेड़ो :12 फीसदी रोपनी कारण: कमबारिश

अनगड़ा : 18 फीसदी रोपनी

बुढ़मू : 10 फीसदी रोपनी

कारण: 21जुलाई तक सिर्फ 6 मिमी बारिश। पिछले साल 30 मिमी हुई थी।

{किसानोंके खेत में बिचड़ा तैयार है, जो सूखने के कगार पर है। रोपनी भगवान भरोसे ही है।

ओरमांझी : 25-30 फीसदी

कारण: 30फीसदी बारिश

{बुधवाररात जोरदार बारिश के बाद किसान रोपाई में लगे हैं। बीटीएम मुन्नी कुजूर ने बताया कि पिछले वर्ष अबतक 60 प्रतिशत रोपनी हुई थी।

मांडर-चान्हो: 5 फीसदी

कारण: कमबारिश

{सबसेखराब स्थिति लुंडरी और रोल पंचायत की है। नदी के आसपास के खेतों में ही सिंचाई हो पाई है। अन्य स्थानों पर सूखे की स्थिति बन रही है।

रातू : 2.16 फीसदी धनरोपनी

कारण: कमबारिश

{कृषिविभाग के अनुसार बिचड़ा तैयार है। एक सप्ताह में बारिश नहीं हुई तो सूखने की स्थिति में जाएगा। बिचड़ा 30 दिनों तक ही सही रहता है।

इटकी : 30 फीसदी रोपनी

कारण: 40फीसदी ही बारिश

{किसाननंदलाल महतो ने बताया कि बारिश कम हुई है। सक्षम किसान बोरिंग और कुआं से कर रहे हैं रोपनी। अधिक समय तो बीत गया है।

खलारी : 04 फीसदी

कारण: कमबारिश, खेतों में पानी की कमी

{कृषिपदाधिकारीमहावीर बैठा बीटीएम सुमन बारला ने बताया कि 16 जुलाई तक बुआई का काम शुरू नहीं हो पाया। कुछ बोरिंग से रोपनी कर रहे हैं।

पिस्का नगड़ी : 10 फीसदी रोपनी

कारण: कमबारिश के बराबर

{किसानमित्र प्रभात महतो ने बताया कि पूरे क्षेत्र में अब तक औसत 10 फीसदी रोपनी ही हुई है, जो पिछले साल से काफी कम है।

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