छात्रा ने कविता से दी विनय को श्रद्धांजलि
उड़ना चाहता था उन पंछियों में
पर वो कर पाया मां
रचना चाहता था एक दुनिया
अपने इन हाथों से मां
तुम्हें भी ले जाता वहां पर
पर रच वो पाया मां
कैसे कहता ये सब बातें
उन्होंने धमकाया था मां
बताना चाहता था तुम्हें ये बातें
पर पापा का तप टूट जाता मां
डर लगता था क्या बताऊं
बस डरकर ही रहता था मां
तुमने भी तो नहीं था जाना
कैसे वहां रहता था मां
भाइयों को बोलो खुश रहेंगे
पर उनको सजा दिलाना मां
जिन्होंने तुझसे झूठ है बोला
और मुझे मारा था मां
नहीं बताया यह सोचकर
रोना मत बता देता हूं
मेरी छोटी सी गलती थी
माफ कर दो इस बार मां
चलता हूं अब जाना होगा
परियों ने बुलाया है मां
रोना मत फिर कह रहा हूं
पर सजा जरूर दिलाना मां
जागृति,छात्रा, 12वीं, जेवीएम श्यामली स्कूल, रांची