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राज्य में पिछड़ों को दें 27% आरक्षण

5 वर्ष पहले
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एकवर्ष तक खामोश रहने के बाद आजसू प्रमुख सुदेश कुमार महतो मंगलवार को अपने समर्थनवाली सरकार के खिलाफ मुखर हुए। ओबीसी आरक्षण को मुद्दा बनाते हुए कहा कि अविभाजित बिहार में इस वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण हासिल था, पर झारखंड गठन के बाद इसे घटाकर 14 फीसदी कर दिया गया। हालांकि यह हाईकोर्ट के निर्देश पर किया गया, लेकिन विशेष परिस्थिति में आरक्षण सीमा बढ़ाई जा सकती है। कई राज्यों में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण है, इसलिए सरकार विधानसभा से एक प्रस्ताव पारित कराकर केंद्र को भेजे।

स्थानीय नियोजन दोनों नीति जरूरी

सुदेशने कहा कि स्थानीय नीति बहुत जरूरी है। यह पहचान से जुड़ा मसला है। नियोजन नीति भी जरूरी है, जो लोग आदिवासी-मूलवासी हैं, उनकी पहचान में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन, जो झारखंड गठन या उसके पूर्व यहां आकर रोजी-रोजगार के कारण बस गए, उनके हितों की रक्षा के लिए सरकार एक सर्वमान्य डेट लाइन तय कर स्थानीय नीति बनाए। उन्होंने सरकार के उस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि उनकी पार्टी अपना लिखित प्रस्ताव विचार स्थानीय नीति को लेकर सरकार को सौंप चुकी है। उन्होंने कहा कि अब केंद्र राज्य दोनों में एनडीए की सरकार है, इसलिए झारखंड को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए।

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