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अभ्यर्थियों में नाराजगी, किया प्रदर्शन कहा-विज्ञापन में संशोधन करे सरकार

5 वर्ष पहले
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झारखंडकर्मचारी चयन आयोग द्वारा संशोधित विज्ञापन जारी करने के बाद भी अभ्यर्थियों में आक्रोश कम नहीं हुआ है। इतिहास विषय के साथ राजनीति विज्ञान रहने के बाद ही अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेंगे। यानि शिक्षक बनने के लिए इतिहास के साथ राजनीति विज्ञान होना जरूरी है। सोमवार को नाराज अभ्यर्थी दोपहर 12 बजे प्रोजेक्ट भवन के समक्ष पहुंच गए। पुलिस ने अभ्यर्थियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।

इसके बाद आक्रोशित अभ्यर्थी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे। फिर स्कूली शिक्षा सह साक्षरता विभाग की सचिव अराधना पटनायक से मिले और इतिहास के साथ राजनीति विज्ञान की बाध्यता समाप्त करने के संबंध में ज्ञापन सौंपा। सचिव ने स्पष्ट कहा कि नियुक्ति नियमावली के अनुसार ही विज्ञापन निकाला गया है। अब इसमें संशोधन संभव नहीं है। इसके बाद अभ्यर्थियों ने बाहर आकर कहा कि मांग के समर्थन में उग्र आंदोलन चलाया जाएगा।

प्रोजेक्ट भवन धुर्वा स्थित सचिवालय के पास प्रदर्शन करते अभ्यर्थी, बाद में शिक्षा सचिव से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।

आरयू का भी कहना है- विषय की बाध्यता नहीं

अभ्यर्थियोंने एक माह पहले रांची विवि के वीसी डॉ. रमेश कुमार पांडेय से मिलकर अपनी समस्या बताई थी। तब वीसी ने कहा था कि इतिहास ऑनर्स के साथ राजनीति विज्ञान रखने की अनिवार्यता नहीं है। इसके बाद अभ्यर्थियों ने खुशी में नारेबाजी भी की थी। लेकिन जब आयोग द्वारा संशोधित विज्ञापन जारी हुआ, तो उसमें विषय की बाध्यता पहले की तरह यथावत थी। सिर्फ दो विषय की जगह कोर विषय (जिस विषय में अभ्यर्थी आवेदन दे रहे हैं) में 45 प्रतिशत अंक जरूरी है। इसके अलावा निगेटिव मार्किंग का प्रावधान भी समाप्त कर दिया गया है।

अभ्यर्थियों के ये हैं तर्क

{राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में इतिहास के साथ राजनीति विज्ञान विषय रखने की अनिवार्यता नहीं है।

{ नागरिक शास्त्र के साथ भी इतिहास विषय रखने की किसी भी विवि में अनिवार्यता नहीं है।

{ सभी विवि में इतिहास प्रतिष्ठा के साथ 16 विषयों में से कोई दो विषय सब्सिडियरी रखने का प्रावधान

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