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रुक्का प्लांट में अनियमितता के आरोपी इंजीनियर सस्पेंड होंगे

5 वर्ष पहले
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पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अंतर्गत स्वर्णरेखा शीर्ष कार्य प्रमंडल रुक्का में प्लांट और पाइप मेंटेनेंस में घटिया उपकरण लगाकर लाखों की कमाई करने के आराेपी इंजीनियर सस्पेंड होने वाले हैं। पेयजल विभाग ने यहां के कार्यपालक अभियंता अरुण कुमार समेत अन्य इंजीनियरों को सस्पेंड करने की फाइल सीएम के पास भेज दी है। इस पर पेयजल मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने भी सहमति दे दी है। बताते चलें कि डीबी स्टार ने 8 दिसंबर 2016 के अंक में शीर्षक ‘पेयजल विभाग ने 12 की जगह आठ एमएम के पाइप ..’ से खबर प्रकाशित की थी। इसमें यहां हो रही गड़बड़ी को उजागर किया था। इसके बाद ही यह कार्यवाही हो रही है।

8 दिसंबर 2016 को प्रकाशित खबर

नया पार्ट्स लगाने की जगह पुराने को किया रंग-रोगन और बांट ली राशि

शिकायतोंके अनुसार क्लेरीफिकेशन/क्लेरिफायर एक से छह में कोई काम नहीं हुआ है। मुश्किल से 10-10 हजार रुपया लगाया गया और 5 लाख की निकासी की गई। यह कार्य 2014-15 में किया गया है। क्लेरिफायर की सभी सीढ़ी पुरानी हैं। केवल रंगरोगन कराया गया। इसमें 10-10 लाख की गड़बड़ी की गई। क्लेरिफायर से लेकर केमिकल हाउस के ऊपर सभी पाइप व्हील, एक्सिल भट्टी और टंकी बदलना था। लेकिन आज तक रंगरोगन करके 25 लाख की निकासी कर ली गई। इसके अलावा आउटसोर्सिंग के मजदूरों के भुगतान और पानी छानने के लिए फिल्टर बेड बनाने में भी गड़बड़ी की गई है।

जांच को दबाने में जुटे थे

रुक्काप्रमंडल में कई सालों से गड़बड़ी चल रही है। यहां मनचाहे ठेकेदारों के लिए इंजीनियरों ने तिगुना-चौगुना प्राक्कलन तैयार कर उन्हें अवैध रूप से लाभ पहुंचाया है। पिछले दो से तीन सालों में ही यहां मेंटेनेंस के नाम पर लगभग चार करोड़ रुपए की गड़बड़ी की गई है। जब सरकार को इसकी शिकायत मिली, तो अधिकारी और इंजीनियर जांच को ही दबाने में जुट गए।

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