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जिस विभाग में टाइपिस्ट के रूप में करियर की शुरुआत की वहीं बने विभागाध्यक्ष

5 वर्ष पहले
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जानेमाने मानवशास्त्री और रांची यूनिवर्सिटी पीजी एंथ्रोपोलॉजी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एबी शरण का सोमवार को निधन हो गया। वे 86 वर्ष के थे। उन्हें हार्ट और डयबिटीज की शिकायत थी। शाम चार बजे हरमू मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। डॉ. शरण अपने पीछे चार बेटियों डॉ. संगीता शरण, चांदनी शरण, रैना कुमार शैली कुमार का भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। बड़े दामाद अजीत कुमार ने उन्हें मुखाग्नि दी।

एंथ्रोपोलॉजी के शिक्षक डॉ. विजय प्रकाश शर्मा ने बताया कि डॉ. शरण शुरू में विभाग में टाइपिस्ट का कार्य करते थे। बाद में रांची कॉलेज में शिक्षक और उसके बाद पीजी विभाग के एचओडी और सोशल साइंस के डीन बने। उनके निधन पर वीसी डॉ. रमेश कुमार पांडेय, डॉ. एके चौधरी, डॉ. एससी गुप्ता, डॉ. मिथिलेश, डॉ. एसएम अब्बास सहित कई शिक्षाविदों ने शोक व्यक्त किया है।

घरेलू पेपर्स की भी थीं अलग-अलग फाइलें : डॉ.शरण की बेटी रैना कुमार बताती हैं कि उनकी कार्य शौली हम सभी बहनों को काफी सीख मिली है। उन्होंने घर के बिजली बिल से लेकर डाॅक्टर से इलाज तक के कागजात के लिए अलग-अलग फाइलें बना रखी थीं।

सेंटर ऑफ एडवांस स्टडी को बंद होने से बचाया : यूजीसीने एंथ्रोपोलॉजी के सेंटर ऑफ एडवांस स्टडी के 8 कर्मचारियों का वेतन बंद कर दिया था। एचओडी के नाते डॉ. शरण ने दिल्ली जाकर वेतन मद की राशि निर्गत कराई और विभाग को बंद होने से बचा लिया।

डॉ. शरण की उच्च शिक्षा अमेरिका में हुई। इसके बाद आरयू में पीजी एंथ्रोपोलॉजी के फर्स्ट एचओडी डॉ. सच्चिदानंद के अंतर्गत उन्होंने डी-लिट की उपाधि ली। इसका विषय मर्डर एंड सुसाइड था। वर्ष 1957 में पीजी एंथ्रोपोलॉजी के सेकेंड एचओडी बने। 1985 में एक बार फिर एचओडी बनने का अवसर प्राप्त हुआ। तब उन्होंने डॉ. एलपी विद्यार्थी की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य किया।

एंथ्रोपोलॉजी के पूर्व एचओडी एबी शरण का निधन

डॉ. एबी शरण

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