जूनियर फनकारों ने जाने पाइका के पग और नर्तन
कहते हैं कि संस्कार के निर्माण में घर की परवरिश के साथ वातावरण का भी योगदान होता है। इन दिनों ऐसे ही वातावरण का गवाह बना है आर्ट हब के रूप में विकसित हो रहा आड्रे हाउस। दिनभर जो कॉलेज और स्कूली छात्राओं की चहक और ठुमक से गुलजार रहता है। युवा नृत्यांगना गार्गी मलकानी अपनी साधना नन्ही-मुन्नी बच्चियों के मार्फत सार्थक कर रही हैं। उनकी कोशिशों से सांस्कृतिक निदेशालय के बैनर तले 21 दिवसीय शास्त्रीय नृत्य कार्यशाला का आयोजन किया गया है। बुधवार को वर्कशाप के दसवें दिन बच्चों ने माइम के भावनयन सीखे, वहीं झारखंड की ख्याति पाइका के संग खूब थिरके। पद्मश्री निरंजन गोस्वामी ने उन्हें भावभंगिमाओं के सहारे मूक अदा के जौहर से रूबरू कराया। जबकि झारखंडी नृत्य की महफिल शिवशंकर महली, महावीर नायक और मनपूरन नायक ने सजाई। जिन्होंने रांची के हमारे जूनियर्स फनकारों को पाइका के कई पग और नर्तन से परिचित कराया।
आजहोगा झूमर
गुरुवारको यही तीनों गुरु मर्दानी और जनानी झूमर की बारीकियां बताएंगे। कथक नृत्य और मूवमेंट पर केंद्रित यह वर्कशाप 21 फरवरी तक चलेगा। आयोजन में संस्कार भारत झारखंड, रांची का युवा रंगमंच, धारित्री कला केंद्र, पाजेब और शिवांगी इंटरनेशनल डांस एकेडमी, सृष्टि रंग मंच, हटिया और धनबाद के घरखंड रंगसमूह ने सहयोग किया है।
CLASSICAL WORKSHOP