8 साल की सुस्ती से 4 करोड़ की जमीन हुई 47 करोड़ की
अब तैयार हुअा है प्रस्ताव आरआरडीए ने सरकार को पत्र लिखकर मांगा पैसा
सिटीरिपोर्टर | रांची
राजधानीमें इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) बनाने के लिए 9.20 एकड़ रैयती जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। जमीन अधिग्रहण के लिए आठ साल पहले तैयार प्रस्ताव में जहां चार करोड़ रुपए खर्च होने थे, अब उतनी ही जमीन के लिए लगभग 47.64 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे। रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (आरआरडीए) के उपाध्यक्ष ने नगर विकास विभाग को पत्र लिखकर पैसा देने का आग्रह किया है। ताकि जिला भू अर्जन कार्यालय को पैसा देकर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो सके।
अधिकारियों की लापरवाही से आईएसबीटी के लिए अधिग्रहण होने वाली जमीन का रेट 11 गुणा अधिक हो गया। अब आईएसबीटी बनाने में सबसे बड़ी चुनौती इतना अधिक पैसा देकर जमीन का अधिग्रहण करना है।
^इंटर स्टेट बस टर्मिनल और ट्रांसपोर्ट नगर बनाने पर काम शुरू हुआ है। प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण के लिए मूल्यांकन कर पैसा मांगा है। इसलिए सरकार से पैसे की मांग की गई। नए कानून के मुआवजा देने से रैयतों को अधिक फायदा होगा। -प्रशांतकुमार, उपाध्यक्ष, आरआरडीए
ट्रांसपोर्ट नगर में भी फंसेगा मामला
उक्तजमीन के अधिग्रहण के लिए आरआरडीए ने जिला प्रशासन को लगभग 7 करोड़ का भुगतान किया है। लेकिन सरवल में भी जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव नए कानून के तहत होना है। ऐसे में जमीन अधिग्रहण के लिए 10 गुणा अधिक रेट देना होगा। क्योंकि सरवल में भी अधिग्रहण का प्रस्ताव आठ साल पहले तैयार हुआ था।
जाम-प्रदूषण कम होगा रोजगार भी मिलेगा
रिंगरोड से होते हुए सभी बसें टर्मिनल में जाएगी। कांटा टोली से बड़ी बसों का परिचालन बंद होने से शहर में जाम नहीं लगेगी। सिटी बस और सीधे बस स्टैंड से इंटर स्टेट बस टर्मिनल तक कनेक्टिविटी देगी। इससे रोजगार भी मिलेगा। ऑटो परिचालन शहरी क्षेत्र के बाहर होने से जाम और प्रदूषण की समस्या कम होगी।
आईएसबीटी का निर्माण नामकुम के सरवल में होना था, पर बस परिचालन की सुविधा को देखते हुए इसे कांके अंचल के सुकुरहुटू में प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर की जमीन में शिफ्ट कर दिया गया है। यहां पर लगभग 40 एकड़ गैरमजरुआ जमीन है, जहां जाने के लिए लगभग 9.20 एकड़ जमीन अधिग्रहीत होनी है। वर्ष 2008 में आरआरडीए ने प्रशासन को जमीन अधिग्रहण के लिए 3.3 करोड़ रुपए दिए थे। पर आठ वर्ष प्रशासन चुप रहा। अब नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत प्रस्ताव तैयार किया गया है, इससे मुआवजा राशि 11 गुणा अधिक बढ़ गई। इसलिए उपाध्यक्ष ने पूर्व में दिए गए 3.3 करोड़ रुपए के अलावा कुल 44.64 करोड़ रुपए मांगे हंै।