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विनय के गांव से लाइव: पिता मनबहाल के ऐसे सवाल-सुनते ही कलेजा फट जाए

5 वर्ष पहले
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रांची. चंदाघासी में जमी भीड़ के बीच जब मनबहाल स्कूल से लौटे सामानों में से मेडल-ट्रॉफी दिखाते हैं, तो उनकी आंखें भरभरा आती हैं। कहते हैं, इन मेडलों का अब मैं क्या करूं। जब भी देखूंगा, रुलाएंगे हमें।
पैतृक खपरैल मकान के सामने पीपल के पेड़ के नीचे बैठे विनय के पापा मनबहाल महतो की आंखों में उछलता-कूदता उनका मासूम बड़ा बेटा विनयशील है। पापा के कंठ के फूटते ही उसकी हंसमुख जिदंगी छलछला आती है।
वो कहते हैं, 30 जनवरी को उससे बात हुई थी, पापा हमलोग नक्षत्र वन जा रहे हैं। आप ब्वॉयल अंडे लेकर जरूर आना। कौन पिता होगा, जो लाडले की इस इच्छा का मान न रखता। दूसरे दिन संडे था। मनबहाल नक्षत्र वन गए। अंडे भी दिए। विनय बोला, पापा आप एनुअल फंक्शन में साढ़े पांच बजे आ आना। आगे बैठना। हम दो चीज में भाग लिए हैं।

बाबू से यह आखिरी मिलना था। क्या पता था। इसके बाद उसकी पार्थिव देह से सामना होगा। इतना कहकर मनबहाल रोने लगे। धैर्य बंधाने के बाद बोले, घटना की रात 3:11 बजे स्कूल से फोन आया, आप रिम्स चले जाएं। विनय सीढ़ी से गिर गया है। फोन करनेवाले ने बिना नाम बताए कॉल काट दी।
स्कूल पहुंचे तो प्रिंसिपल और टीचर्स ने यह कहते हुए रिम्स भेज दिया कि विनय के साथ हादसा हुआ है। रिम्स में प्रधान सर और एकाउंटेंट संदीप सर मिले। मैं जोर से चिल्लाया, मेरे बाबू को दिखाओ। उन दोनों ने इशारा किया। मेरा लाडला खून से लथपथ बेड पर पड़ा था। पेट पर गहरे चोट का निशान। माथे पर छेद।
फिर बिलखते हुए कहा, वहां से दोनों लापता हो गए। तब से आजतक स्कूल प्रबंधन और प्रशासन से कोई मिलने नहीं आया। बोलते, तो लगता मानो उनका कलेजा फटकर मुंह को आ जाएगा।
छह साल सात महीने का था बाबू जब से वहां पढ़ रहा था। अभी सेवेंथ से एट्थ में जानेवाला था। खेलकूद, चित्रकारी हर चीज में अवार्ड-मेडल जीतकर लाता। बेटा जब अपने दोस्तों से फोन पर अंग्रेजी में बात करता, तो छुप-छुपकर सुनते थे।
विनय ने स्कूल में डांस देखने को बुलाया था
विनय की मां कुशीला देवी दहाड़े मारती हुईं बोलेरो से उतरती हैं और बेसुध हो जाती हैं। गाड़ी से हॉस्टल से लाई गई यादों की चटाई में लिपटी विनय की किताबें-कॉपी, ट्रॉफी-मेडल उतारते हुए हर आंखें नम हो जाती हैं।
कुशीला कहती है, इतवार को बात हुई थी, मम्मी डांस में पार्टीसिपेट किए हैं जरूर आना। उसे यदि कोई परेशानी होती, तो जरूर बताता। जबकि पेट में हल्का दर्द भी होता था, बता देता था। मेरी कोख सूनी हो गई। दूसरे की कोख के साथ ऐसा न हो। विनय सिर्फ मेरा ही नहीं देश का बच्चा था।
जैसा मेरे बाबू के साथ हुआ, ऐसा किसी के लाडले के साथ न हो। फिर स्कूल और शिक्षक पर कौन विश्वास करेगा। अचानक वो चिल्लाती हैं, पांच दिन हो गए। अबतक जांच में लेट क्यों। सीबीआई से जांच हो। आप लोग जल्दी न्याय दिला दीजिए।
सीआईडी ऑफिसर बनना चाहते थे भैया
गुमसुम विवेक की आंखें लगातार बोलती रहीं। जिसमें भैया के साथ उस रात साथ खाना खाते समय की चुहल, भैया का डांस प्रैक्टिस में ठुमकना, कंपीटिशन में जीते मेडल का उनका लहराना महसूस किया जा सकता था। बोला, भैया कहता था, बड़ा होकर सीडीआई ऑफिसर बनूंगा।
उस रात डाइनिंग हॉल में हम साथ थे। भैया ने बताया था, बुखार अब नहीं है। भैया के दोस्तों में सत्यम, करणदीप, पुष्पम और नयन हैं। लेकिन रूम में क्षीतिज और सोनू रहते थे। क्षीतिज घर गया हुआ है। रूम में उस रात सोनू ही भैया के साथ सोया था।
इधर, विधायक नवीन जायसवाल को ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा। पांच दिनों बाद उनके पहुंचने पर लोग नाराज थे। तेली समाज के मुकेश कश्यप भी तिलेश्वर साहू की पत्नी साबू देवी के साथ परिजनों को दिलासा देने पहुंचे थे।
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