रांची. बर्खास्तगी के चार साल बाद आईपीएस अधिकारी पीएस नटराजन को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल ने सोमवार को राहत दे दी। कैट की रांची बेंच ने यौन शोषण के आरोपी नटराजन की याचिका पर सुनवाई करने के बाद सरकार के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसके तहत उन्हें मार्च 2012 में बर्खास्त किया गया था।
ट्रिब्यूनल की जज उर्मिला दत्ता सेन व एके उपाध्याय की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मामले में बर्खास्तगी की प्रक्रिया का सही तरीके से अनुपालन नहीं किया गया।
साथ ही प्रार्थी के साथ नैसर्गिक न्याय नहीं हुआ। सरकार चाहे तो इस मामले में पुन: विभागीय कार्रवाई शुरू कर सकती है। नटराजन जब रांची में जोनल आईजी के पद पर कार्यरत थे तो सुषमा बड़ाईक ने उनपर यौन शोषण का आरोप लगाया था।
मामले की सुनवाई अभी भी सिविल कोर्ट रांची में चल रही है। खंडपीठ ने कहा सरकार ने यूपीएससी के सुझाव के आधार पर बर्खास्तगी का निर्णय ले लिया, जबकि इस मामले में नटराजन को भी पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए था। इसके अलावा जिस जांच कमेटी ने नटराजन के विरुद्ध जांच की उसमें जांच पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली सही नहीं थी।