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होर्डिंग्स मेकिंग से मिल रहा रोजगार

7 वर्ष पहले
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राजधानीमें होर्डिंग्स का बाजार दिनोदिन बड़ा होता जा रहा है। इसका व्यापार कितना अधिक फैल गया है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि छोटे शहरों में भी हर जगह होर्डिंग्स, बैनर आदि दिख जाते हैं। किसी भी वस्तु को मार्केट में लाना हो, बेचना हो, उसके लिए यह तरीका सर्वोत्तम माना जाता है। बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ अब छोटे शहरों के सामान्य दुकानदार भी अपनी दुकान के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए जम कर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। यही वजह है कि होर्डिंग मेकिंग एक बेहतर लघु उद्योग बन गया है।

गली-मुहल्लेमें चल रहा है उद्योग

होर्डिंग्ससेंटर को चलाने के लिए बहुत बड़ी जगह की जरूरत नहीं होती। स्क्रीन प्रिंटिंग प्रेस में काम होता है, उसी से मिलता-जुलता यह काम होने के कारण निगेटिव बनाकर हजारों की संख्या में उसे प्रिंट किया जा सकता है। यह काम एक बड़े कमरे में भी आसानी से हो जाता है। यही वजह है कि शहर की गली-मुहल्ले में भी होर्डिंग्स सेंटर चल रहे हैं। इस लघु उद्योग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए एजुकेशन की बहुत जरूरत नहीं होती। इस काम में कम पढ़े-लिखे युवकों को भी आसानी से रोजगार का साधन उपलब्ध हो रहा है।

युवा हो रहे आकर्षित

एक-दोमहीने किसी भी सेंटर में काम करने से मेकिंग की बारीकियां सीखी जा सकती हैं। यही वजह है कि होर्डिंग्स मेकिंग के प्रति युवा सबसे ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। होर्डिंग्स का बाजार छोटे शहरों तक पहुंच गया है। मो.उसमान, सेंटरसंचालक

तेजी से फैल रहा उद्योग

एडवरटाइजिंगमें पीएचडी करने वाले डॉ. शाहिद अख्तर बताते हैं कि झारखंड में मल्टी नेशनल कंपनियों के आने के बाद यह उद्योग बहुत बड़ा हो गया है। इस उद्योग में कई काम ऐसे हैं जो निरक्षर युवक भी कर सकते हैं। रांची सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों युवकों को रोजगार मिल रहा है।

एक्सपर्ट व्यू

मेन रोड स्थित मल्लाह टोली के समीप एक होर्डिंग्स मेकिंग सेंटर में फ्लैक्स प्रिंट करता युवक।