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नीलेश रघुवंशी को मिला शैलप्रिया स्मृति सम्मान

7 वर्ष पहले
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बहुमुखीसृजनशीलता के लिए मशहूर युवा लेखिका नीलेश रघुवंशी को रविवार को वन सभागार, डोरंडा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ख्यात लेखिका अलका सरावगी ने दूसरे शैलप्रिया स्मृति सम्मान से नवाजा। उन्हें मान पत्र पंद्रह हजार रुपए की राशि पुरस्कार स्वरूप भेंट की। गौरतलब है कि रांची की प्रतिभावान कवयित्री शैलप्रिया का 01 दिसंबर 1994, को महज 48 साल की उम्र में कैंसर से जूझते हुए निधन हो गया था। गत वर्ष उनके परिजनों ने शैलप्रिया स्मृति न्यास का गठन किया। पहला शैलप्रिया सम्मान निर्मला पुतुल को दिया गया था।

लेखक महादेव टोप्पो ने न्यास के बारे बताया। पत्रकार प्रियदर्शन ने कहा कि शैलप्रिया के सरोकारों से लैस नीलेश रघुवंशी जीवन की भट्ठी से निकली रचनाकार हैं। मान पत्र अनुराग अन्वेषी ने पढ़ा। नीलेश ने कई कविताओं का पाठ किया। अध्यक्षता की लेखक मनमोहन पाठक ने, संचालन सुशील अंकन ने किया।

पुस्तक का लोकार्पण

अनामिका प्रिया की आलोचना पुस्तक हिंदी का कथा साहित्य और झारखंड लोकार्पित की गई। इस पर प्रो. मिथिलेश ने टिप्पणी की। मौके पर विद्याभूषण, अशोक प्रियदर्शी आदि मौजूद थे।

समकालीन महिला लेखन का बदलता परिदृश्य विषय पर हिस्सा लेते हुए रविभूषण ने कहा कि नव उदारवादी अर्थव्यवस्था में स्त्री लेखन अधिक मुखर हुआ। प्रियदर्शन बोले कि परंपरा आधुनिकता दोनों स्त्री विरोधी हैं। अलका सरावगी ने महिला लेखन को अलग से देखे जाने से इंकार किया। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष महुआ माजी ने भी विचार रखे।

बदलता स्त्री लेखन

सम्मान ग्रहण करतीं नीलेश रघुवंशी।