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मानवाधिकार आयोग में शिकायतों पर अब होने लगी है त्वरित सुनवाई
झारखंडमें राज्य मानवाधिकार आयोग अब अपने पैर पर खड़ा होने लगा है। आयोग में मामले भी आने लगे हैं और उन पर त्वरित सुनवाई भी हो रही है। कुछ ही दिन पहले आयोग ने गुमला में दो निर्दोष की मौत मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था। मानवाधिकारों के प्रति लोगों में जागरूकता का ही परिणाम है कि आयोग तक बड़ी संख्या में शिकायतें पहुंचने लगी हैं। इनमें पुलिस प्रताड़ना, गलत आरोप में एनकाउंटर, ट्रैफिकिंग, नक्सली बता कर सरेंडर कराने, नौकरों के साथ मारपीट, कार्यस्थल पर मारपीट मामले प्रमुख हैं।
आयोग में अभी प्रेसीडेंट, सेक्रेट्री, अंडर सेक्रेट्री ही पदस्थापित हैं। सदस्य का पद रिक्त है। विभिन्न विभागों द्वारा आयोग के आदेश का त्वरित पालन नहीं करने के मामले भी आते रहते हैं, उसके बाद भी आयोग केसों का निपटारा कर रहा है। मानवाधिकार आयोग में इस वर्ष एक हजार मामलों का निष्पादन किया गया है।
आयोग कर रहा काम : अध्यक्ष
ऑनलाइन भी कर सकते हैं शिकायत
जन्म लेने के अधिकार से लेकर सांस लेने तक के अधिकार, पानी पीने, जीने, रहने, खाने आदि के अधिकार मानवाधिकारों की सूची में आते हैं। अभी तक मानवाधिकारों की कोई अंतिम सूची नहीं है। शिक्षा, चिकित्सा और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के समान उपयोग, शोषण के विरुद्ध, रंग भेद, लिंग भेद के विरोध, आजादी, बराबरी समानता का अधिकार आदि प्रमुख मानवाधिकार हैं। इसके साथ ही नागरिक और राजनीतिक के साथ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार भी मानवाधिकार की श्रेणी में आते हैं।
मानवाधिकारों की सूची में ये प्रमुख हैं