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शुल्क के पैसे कहां जाते हैं कोई हिसाब-किताब नहीं

7 वर्ष पहले
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रांचीजिले के सरकारी हाईस्कूलों के छात्रों से सुविधा के नाम पर स्कूलों द्वारा कई मदों में शुल्क लिए जाते हैं। लेकिन, छात्रों से जिस मद में शुल्क लिया जाता है, उन्हें उसकी सुविधा नहीं दी जाती है। शुल्क ज्यादा नहीं है, लेकिन अगर रांची जिले के स्कूलों का आकलन करें, तो लाखों रुपए शुल्क के रूप में जमा किए जाते हैं। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले ज्यादातर छात्र सामान्य परिवार से आते हैं। छात्रों से हर साल लिए जाने वाली इस राशि का क्या इस्तेमाल हो रहा है, इनका हिसाब लेने वाला कोई नहीं है।

अधिकतर हाईस्कूलों का हाल यह है कि विद्यार्थियों से शुल्क तो ले लिए जाते हैं, लेकिन उन्हें सिनेमा दिखाया जाता है और ही खेल की सामग्री दी जाती है। पत्रिका के नाम पर एक अखबार भी स्कूल में नहीं आता। जब इस संबंध में स्कूलों के प्रधानाध्यापकों से सवाल किए गए कि राशि लिए जाने के बाद भी ऐसा क्यों, तो अधिकतर का जवाब लगभग यही था कि आज के छात्र स्कूलों में एजुकेशनल मूवी देखना नहीं चाहते। खेल का मैदान स्कूलों में नहीं है, इसलिए उन्हें खेल का सामान नहीं दिया जाता है।

ऑडिट करने वाला कोई नहीं

राशि के उपयोग की जानकारी लेंगे

^विद्यार्थियों से अगर इन मदों में राशि ली जा रही है, तो प्रधानाध्यापक का यह दायित्व है कि इनका उपयोग छात्रों के लिए सुविधा बेहतर बनाने के लिए करें। लेकिन राशि का उपयोग नहीं किया जा रहा है तो यह दुखद बात है। शीघ्र ही हाई स्कूलों के प्रधानाध्यापकों की बैठक होगी। उसमें राशि के उपयोग की जानकारी ली जाएगी। इसके बाद आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।\\\'\\\' शिवचरण मरांडी, जिलाशिक्षा पदाधिकारी, रांची

इन मदों में लिए जाते हैं शुल्क

हाईस्कूलों के प्रधानाध्यापकों का कहना है कि पैसे से स्कूल के लिए चॉक, डस्टर, झाड़ू आदि लाए जाते हैं, जिसका उपयोग छात्रहित में किया जाता है। छात्रों से जो राशि ली जाती है, उसे स्कूल के विकास कोष में डाल कर उसका इस्तेमाल स्कूल के विकास के लिए ही किया जाता है।

प्रधानाध्यापकों की दलील

हाईस्कूल के छात्रों से पुस्तकालय मद में 2 रुपए प्रति छात्र जरूर लिए जाते हैं, लेकिन 100 में 90 हाईस्कूलों में तो पुस्तकालय है और ही किसी छात्र को पढ़ने के लिए किताब दिया जाता है। अधिकतर हाई स्कूलों में स्काउट नहीं है फिर भी छात्रों से स्काउट मद में भी पांच रुपए लिए जाते हैं।

पुस्